11 फरवरी 2018 को है विजया एकादशी,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional vijaya ekadashi history




वेदो, पुराणो तथा शास्त्रो के अनुसार एकादशी व्रत का हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रो के अनुसार वर्ष में 24 एकादशी व्रत पड़ता है जबकि मलमास में 26 एकादशी व्रत पड़ता है।विजया एकादशी को करने से व्रती हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होता है। मान्यता ऐसी है की विजया एकादशी के करने से भयंकर शत्रु पर आप विजय पा सकते है। प्राचीन काल में कई राजा ने इस व्रत के प्रभाव से युद्ध में विजयी हुआ है। इस वर्ष 11 फरवरी  2018  को विजय एकादशी मनाई जाएगी।  devotional vijaya ekadashi history 

व्रत कथा

स्कन्द पुराण के अनुसार त्रेता युग की बात है जब भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्री राम अपनी पत्नी सीता को ढूंढते हुए, सागर तट पर पहुंचे। सागर तट पर प्रभु श्री राम के भक्त जटायु रहा करता था। उन्होंने प्रभु श्री राम को सीता माता के बारे में बताया की लंका पति रावण ने माता सीता का हरण कर लंका ले गया है तथा इस समय माता सीता लंका के अशोक वाटिका में है। devotional vijaya ekadashi history 

माता सीता की खोज में सर्वप्रथम लंका हनुमान जी गए। उन्होंने माता जानकी से मुलाकात कर उन्हें ढाढस बंधाया की जल्द प्रभु श्री राम उन्हें लेने लंका आएंगे। तत्पश्चात, हनुमान जी लंका से सागर तट पर आये तथा प्रभु राम को माता जानकी के बारे में बताया। प्रभु राम तथा वानर सेना लंका पर आक्रमण की तयारी करने लगे। परन्तु सागर को बिना सेतु पर करना असंभव था। अतः लंका पहुचना प्रभु राम तथा वानर सेना के लिए एक कठिन प्रश्न बन गया। devotional vijaya ekadashi history 

भगवान विष्णु इस अवतार में मर्याद पुरषोत्तम के उदहारण को प्रस्तुत करना चाहते थे। अतः उन्होंने इस संदर्भ में लक्ष्मण जी इसका उपाय पूछा। तब लक्ष्मण जी ने कहा आप तो सर्वशक्तिमान आपसे कोई चीज़ नही छिपी है। लंका में जीत कैसे सुनिश्चित हो इसके लिए आधा योजन दूर परम ज्ञानी वकदाल्भ्य मुनि का निवास हैं। उनसे मिलके पूछते है की कोई उपाय बताये। ताकि जीत अपनी सुनिश्चित हो।devotional vijaya ekadashi history 



जानकी जयंती की कथा एवं इतिहास

तदुपरांत, प्रभु राम तथा समस्त वानर सेना मुनि के आश्रम पर पहुंचे। जहाँ उनका स्वागत किया गया। मुनि ने बताया, प्रभु फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी व्रत को करे। इस व्रत को करने से जीत प्राप्त होती है।प्रभु राम ने विजया एकादशी व्रत को किया। इस व्रत को करने से प्रभु श्री राम ने लंका पति रावण को युद्ध में पराजित किया तथा माता जानकी को मुक्त कराया। devotional vijaya ekadashi history 

एकादशी की पूजन विधि

प्रभु श्री राम जी ने जिस विधि से विजया एकादशी को किया था उसी विधि-विधान से व्रती को विजया एकादशी का व्रत करना चाहिए। दशमी के दिन एक वेदी बनाकर उस पर पर सप्तधान स्थापित करे तथा सामर्थ्य अनुसार उस पर स्वर्ण, रजत, तांबा अथवा मिटटी का कलश उस पर रखे। devotional vijaya ekadashi history 

विजय एकादशी के दिन उस कलश में पंच्पल्ल्व रखकर भगवान श्री विष्णु की प्रतिमूर्ति स्थापित करे। विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, धुप, दीप, चन्दन एवम तुलसी से विधि-विधान से करे। व्रती को दिन भर उपवास रखना चाहिए तथा प्रभु का भजन-कीर्तन करना चाहिए। रात्रि में फलाहार कर कलश के समीप बैठकर जागरण करे। द्वादशी के दिन कलश को योग्य ब्राह्मण को दान कर दे। devotional vijaya ekadashi history 

विजया एकादशी का महत्व

विजया एकादशी के करने से व्रती को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में जीत हासिल होती है। विजया एकादशी को विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु प्रसन्न होते है तथा भगवान विष्णु जी की कृपा से व्रती के सारे बिगड़े काम बन जाते है एवम उनके जीवन में मंगल ही मंगल होता है। इस तरह विजया एकादशी की कथा सम्पन्न हुआ। प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु जी की जय।  devotional vijaya ekadashi history 
( प्रवीण कुमार )

loading…


You may also like...