जानिए विनायक चतुर्दशी की कथा एवम इतिहास

 stroy-and-history-of-vinayak-chaturadashi



सोमवार 29 मई 2017 को विनायक चतुर्दशी मनाया जाएगा। धार्मिक धारणा है की हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा से प्रत्येक शुभ कार्य आरम्भ किया जाता है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। devotional vinayak chaturdashi history 

गौरी पूजा की कथा एवम इतिहास

सनातन धर्म में 24 दिन ऐसे होते है जो पूर्णतः भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। अतः वर्ष की हर माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को विनायक या संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है जिसमे भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। devotional vinayak chaturdashi history 




विनायक चतुर्दशी की कथा devotional vinayak chaturdashi history 

शिव रहस्य पुराण के अनुसार भगवन गणेश जी शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव जी एवं माता पार्वती के पुत्र रूप में प्रकट हुए थे। शिव पुराण में कहा गया है कि देवी गिरिजा ने भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए 12 वर्षो तक कठिन तपस्या, व्रत एवं साधना की जिसके फलस्वरूप शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के दिन मध्यान में स्वर्ण कांति से युक्त भगवान गणेश जी प्रकट हुए थे। अतः ब्रह्मा जी ने चतुर्दशी व्रत को अतिश्रेष्ठ व्रत बताया है।

विनायक चतुर्दशी पूजन विधि devotional vinayak chaturdashi history 

वर्ष के प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को विनायक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन संध्याकाल में स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश जी की पुष्प, अक्षत, शुद्ध जल, पंचामृत, धुव से पूजा आराधना करना चाहिए। आरती तथा पुष्पांजलि अर्पित कर प्रदक्षिणा करना चाहिए। पूजा समाप्ति के समय भगवान विघ्नहर्ता से सुख और मंगल की कामना करे। devotional vinayak chaturdashi history 

भगवान गणेश भक्तो की सारी मनोकामना पूर्ण करते है। इस दिन संध्याकाल में चन्द्र दर्शन करने के पश्चात भोजन ग्रहण करे। इस तरह विनायक चतुर्दशी की कथा सम्पन्न हुई । भक्त गण प्रेम से बोलिए गणपति बप्पा मोरया। विनायक चतुर्दशी की कथा एवम इतिहास devotional vinayak chaturdashi history 
( प्रवीण कुमार )

loading…


You may also like...