9 जुलाई 2018 को है योगिनी एकादशी,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

history and story of yogini ekadashi



हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी व्रत मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष गुरूवार मंगलवार 9 जुलाई 2018 को योगिनी एकादशी व्रत मनाई जाएगी। एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है। योगनी एकादशी के दिन पीपल वृक्ष की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। devotional yogini ekadashi

योगिनी एकादशी व्रत कथा devotional yogini ekadashi

पौराणिक कथा अनुसार प्राचीन काल में अलकापुरी नामक नगरी में कुबेर नाम का राजा राज करता था। राजा भगवान शिव जी का अनन्य भक्त था तथा राजा भगवान शिव जी की प्रतिदिन पूजा करने नगर में स्थित भगवान शिव जी के मंदिर जाया करता था। राजा के पूजा हेतु पुष्प प्रतिदिन हेम नामक माली लाया करता था। devotional yogini ekadashi

एक दिन हेम माली नियमित समय पर राजा के प्रागण में पुष्प लेकर नही आया । तत्पश्चात राजा ने सेवको को आदेश दिया कि जाके पता लगाए की हेम माली आज क्यों नही आया। सेवक गण जब हेम माली के प्रवास पर पहुंचे तो दृश्य देखकर शीघ्रः ही राजा कुबेर के पास लौट आया। तदोपरांत सेवको ने राजा को बताया कि हेम माली अपनी स्त्री के साथ रमन कर रहा है। सेवको की वचनो को सुनकर राजा ने हेम माली को बुलाने का आदेश दिया। राजा कुबेर की आज्ञानुसार हेम माली को राजा के सम्मुख प्रस्तुत किया गया। क्रोध में उस समय राजा कुबेर ने हेम माली को श्राप दे दिया। मुर्ख, स्त्री के रमन में तू नित्य कर्म करना भूल गया अब तुम स्त्री का वियोग भी भोगेगा एवम मृत्यु लोक में जाकर कोढ़ी हो जायेगा। devotional yogini ekadashi




मासिक कार्तिगाई की कथा एवम इतिहास

राजा कुबेर के श्राप से हेम माली तत्क्षण कोढ़ी हो गया। स्त्री के वियोग एवम कोढ़ के प्रभाव से हेम माली ने महादुःख कष्ट सहे। किन्तु परिस्थिति प्रतिकूल होने के बाद भी हेम माली की बुद्धि मलिन नही हुई। हेम माली हिमालय पर्वत की ओर चल दिया। हिमालय मार्ग में हेम माली की भेंट एक ऋषि से हुई। हेम माली ने उन्हें विनय पूर्वक प्रणाम कर उनसे श्राप प्रभाव से मुक्त होने का मार्ग प्रशस्त करने को कहा। devotional yogini ekadashi

हेम माली की व्यथा सुनकर ऋषि ने कहा की तुम आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करों। इस व्रत को करने से तुम्हे इस श्राप से मुक्ति मिलेगी। ऋषि के वचनो अनुसार हेम माली ने योगिनी एकादशी का व्रत किया। व्रत फल के प्रभाव से हेम माली पुनः अपने पुराने स्वरूप में आ गया और अपनी स्त्री के साथ सुख पूर्वक रहने लगा। devotional yogini ekadashi

योगिनी एकादशी व्रत का महत्व devotional yogini ekadashi

धार्मिक मतानुसार योगिनी एकादशी के कथा श्रवण मात्र से अठ्ठासी सहस्त्र ब्राह्मणो को भोजन करने के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस व्रत के करने से व्रती के समस्त पापो का नाश होता है। इस दिन दान देने का उल्लेख हिन्दू ग्रंथो में निहित है। अतः पूजा सम्पन्न होने के पश्चात सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणो एवम गरीबो को दान दें।

योगिनी एकादशी व्रत पूजा विधि devotional yogini ekadashi

एकादशी व्रत करने के लिए दशमी दिन से व्रत का पालन करना होता है। अतः दशमी के दिन लहसुन, प्याज एवम तामसी भोजन का त्याग करें। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें। दशमी की रात्रि में भूमि पर कुश बिछाकर सोना चाहिए। एकादशी के दिन ब्रम्ह मुहूर्त काल में उठे, स्नान ध्यान आदि से निवृत होकर एकादशी व्रत का संकल्प लें।

भगवान विष्णु जी की पूजा उनकी प्रतिमा स्थापित कर पुष्प, चन्दन, कुमकुम, घी दीप, धूपबत्ती, फल एवम चूरमा प्रसाद से करें। घी दीप से भगवान विष्णु जी की आरती उतारे एवम लड्डू, चूरमा, फल आदि का भोग लागए। पूजा सम्पन्न होने के पश्चात भगवान विष्णु जी से परिवार की कुशल मंगल तथा समस्त पापो को नाश करने की प्रार्थना करें। devotional yogini ekadashi

इस दिन उपवास रखे रात्रि काल में फलाहार करें। धर्म अनुसार एकादशी की रात्रि में जागरण कर भगवान विष्णु जी की भजन-कीर्तन करें। इस प्रकार योगिनी एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु जी की जय। योगिनी एकादशी की कथा एवम इतिहास devotional yogini ekadashi

( प्रवीण कुमार )

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