14 जुलाई 2018 को है जगन्नाथ पूरी रथ यात्रा,जानिए कथा एवम इतिहास

jagannath puri rath yatra story



प्रतिवर्ष ओडिशा के पूर्वी तट पर स्थित श्री जगन्नाथ पूरी में भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा का उत्सव बड़े ही धूमधाम से आयोजित किया जाता है। यह पर्व आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया से आरम्भ होकर शुक्ल पक्ष की एकादशी तक मनाया जाता है। तदनुसार इस वर्ष रथ यात्रा रविवार 25 जून 2017 को प्रारम्भ होकर 14 जुलाई 2018 को समाप्त होगी। रथ यात्रा में रथ को अपनी हाथों से खीचना अति शुभ माना जाता है। jagannath puri rath yatra story

रथयात्रा का इतिहास jagannath puri rath yatra story 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में एक बार श्री सुभद्रा जी ने नगर देखना चाहा, उस समय भगवान श्री कृष्ण उन्हें रथ पर बैठाकर नगर का भर्मण करते है। इसी उपलक्ष्य में ओडिशा राज्य के पूर्वी तट पर स्थित जगन्नाथ मंदिर में हर वर्ष जगन्नाथ जी, बलराम जी एवम श्री सुभद्रा जी की प्रतिमूर्ति को रथ पर बैठाकर नगर के दर्शन कराए जाते है। jagannath puri rath yatra story

रथ का रूप jagannath puri rath yatra story

जगन्नाथ पूरी रथ यात्रा में श्री कृष्ण जी, बलराम जी एवम बहन सुभद्रा का रथ बनाया जाता है। यह रथ लकड़ी से कुशल कारीगर के द्वारा तैयार किया जाता है। जगन्नाथ रथ यात्रा में जगन्नाथ जी के रथ को ‘गरुड़ध्वज’ बलराम जी के रथ को ‘तलध्वज’ एवम सुभद्रा जी के रथ को “पद्मध्वज’ कहा जाता है। jagannath puri rath yatra story 




रथयात्रा महोत्सव jagannath puri rath yatra story

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रथ यात्रा महोत्सव में पहले दिन भगवान जगन्नाथ जी, बलराम जी एवम बहन सुभद्रा जी के रथ को आषाढ़ माह में द्वितीया की शाम तक जगन्नाथ मंदिर से खींचकर कुछ दूर पर स्थित गुडींचा मंदिर तक लाया जाता है। तत्पश्चात आषाढ़ माह की तृतीया को भगवान की मूर्ति को विधि पूर्वक रथ से उतारकर गुंडिचा मंदिर में स्थापित किया जाता है तथा अगले सात दिन तक जगन्नाथ जी, बलराम जी एवम बहन सुभद्रा के साथ इसी मंदिर में निवास करते है। jagannath puri rath yatra story

देवशयनी एकादशी की कथा एवम इतिहास

तत्पश्चात आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन वापसी यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस यात्रा को बाहुड़ा यात्रा कहते हैं। यात्रा के दौरान पुनः गुंडीचा मंदिर से भगवान के रथ को विधिवत खींचकर जगन्नाथ मंदिर तक लाया जाता है। मंदिर पहुँचने के पश्चात प्रतिमाओं को पुनः मंदिर गृह में स्थापित कर दिया जाता है। jagannath puri rath yatra story  jagannath puri rath yatra story 

महाप्रसाद jagannath puri rath yatra story 

जगन्नाथ पूरी मंदिर में रथयात्रा का एक मुख्य आकर्षण महाप्रसाद होता है। जो मंदिर में स्थित रसोई घर में बनाया जाता है। महाप्रसाद में मालपुआ का प्रसाद विशेष रूप से मिलता है। इसके आलावा मिश्रित खिचड़ी का प्रसाद भक्तो में बांटा जाता है jagannath puri rath yatra story

इस प्रकार जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए बाँके बिहारी कृष्ण कनैहया लाल की जय।इस प्रकार जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए बाँके बिहारी कृष्ण कनैहया लाल की जय। jagannath puri rath yatra story 
(प्रवीण कुमार )

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