23 अप्रैल 2018 को है बगलामुखी जयंती,जानिए कथा एवम इतिहास

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धार्मिक मान्यताओ के अनुसार वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी को माँ बगलामुखी का अवतरण दिवस कहा जाता है। जिस कारण इस तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है । इस वर्ष  बुधवा र23 अप्रैल 2018 को बगलामुखी जयंती है । know baglamukhi jayanti history

साधक को इस दिन माँ बगलामुखी की निमित्त पूजा-अर्चना एवम व्रत करना चाहिए। माता बगलामुखी की कृपा से शत्रु का नाश होता है एवम साधक के जीवन से हर प्रकार की बाधा दूर होती है। know baglamukhi jayanti history 

बगलामुखी कथा know baglamukhi jayanti history 

हिन्दू धर्म के अनुसार एक बार सतयुग में ब्रह्माण्ड को नष्ट करने वाला तूफान उतपन्न हुआ, जिससे समस्त लोको में हाहाकार मच गया और समस्त लोक के लोग संकट में आ गए। इस संकट की समस्या में भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए। know baglamukhi jayanti history 

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जब भगवान विष्णु जी को कोई उपाय ना सुझा तो उन्होंने शिवजी को स्मरण किया। तब भगवान शिवजी ने कहा कि यदि कोई इस विनाश को रोक सकता है तो वो शक्ति रूप है। आप उनकी शरण में जाएँ। know baglamukhi jayanti history 




तत्पश्चात, भगवान विष्णु जी ने कठिन तपस्या करके शक्ति रूप देवी को प्रसन्न किया। तदोपरांत माता बगलामुखी देवी प्रकट होकर समस्त लोकों को इस संकट से उबारा। अतः इस दिन से समस्त लोको में माता बगलामुखी का प्रादुर्भाव हुआ। know baglamukhi jayanti history 

माता बगलामुखी व्रत पूजन विधि know baglamukhi jayanti history 

इस दिन प्रातः काल उठे, नियत कर्मो से निवृत होकर पीले रंग का वस्त्र धारण करें। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार व्रती को साधना अकेले मंदिर में अथवा किसी सिद्ध पुरुष के साथ बैठकर माता बगलामुखी की पूजा करनी चाहिए। पूजा की दिशा पूर्व में होना चाहिए। पूर्व दिशा में उस स्थान को जहाँ पर पूजा करना है। उसे सर्वप्रथम गंगाजल से पवित्र कर ले। know baglamukhi jayanti history 

तत्पश्चात उस स्थान पर एक चौकी रख उस पर माता बगलामुखी की प्रतिमूर्ति को स्थापित करें। तत्पश्चात आचमन कर हाथ धोए, आसन पवित्र करे। माता बगलामुखी व्रत का संकलप हाथ में पीले चावल, हरिद्रा, एवम पीले फूल तथा दक्षिणा लेकर करें। माता की पूजा धुप, दीप, अगरबत्ती एवम विशेष में पीले फल, पीले फूल, पीले लड्डू का प्रसाद चढ़ा कर करना चाहिए। know baglamukhi jayanti history  

व्रत के दिन व्रती को निराहार रहना चाहिए। रात्रि में फलाहार कर सकते है। अगले दिन पूजा करने के पश्चात भोजन ग्रहण करे। इस प्रकार माता बगलामुखी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माता बगलामुखी की जय।  know baglamukhi jayanti history 
( प्रवीण कुमार )

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