9 मई 2017 को है छिन्नमस्ता जयंती,जानिए कथा एवम इतिहास

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मार्कण्डेय पुराण के अनुसार छिन्नमस्ता माता दस महा विद्याओ में छठी महाविद्या है। छठी महाविद्या के देवी माता छिन्नमस्ता है। जिनकी जयंती बैशाख माह में मनाई जाती है। इस वर्ष माता छिन्नमस्ता जयंती गुरूवार 9 मई 2017 को मनाई जाएगी। माता छिन्नमस्ता सवसिद्धि को पूर्ण करने वाली अधिष्ठात्री कहलाती है। जिनके नाम मात्र से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। जो मनुष्य माता से विशेष सिद्धि के लिए इस दिन व्रत और उपवास रखता है। उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। know chhinnamasta jayanti history

देवी छिन्नमस्ता की उत्पति कथा know chhinnamasta jayanti history

धार्मिक पुराण के अनुसार एक बार माँ भगवती अपनी दो सहचरियों के संग मंदाकनी नदी में स्नान कर रही थी। स्नान करने के समय दोनों सहचरियों को बहुत तेज भूख लगी। भूख की पीड़ा से उन दोनों सहचरियों का रंग काला हो गया। know chhinnamasta jayanti history

वैशाख पूर्णिमा की कथा एवम इतिहास

तब सहचरियों ने माँ भवानी से भोजन के लिए कुछ माँगा। परन्तु माँ भवानी ने कुछ समय प्रतीक्षा करने के लिए कहा, पर भूख की पीड़ा ना सह पाने के कारण दोनों सहचरियों भोजन की हठ करने लगी। तत्पश्चात दोनों सहचरी नम्रता पूर्वक माँ भवानी से अनुरोध करने लगी कि माँ तो भूखे शिशु को अविलम्ब भोजन प्रदान करती है। know chhinnamasta jayanti history

नम्रता पूर्वक वचन सुनकर माँ भवानी ने अपने खडग से अपना सिर काट लिया। माँ भवानी का कटा हुआ सिर उनके बाए हाथ में आ गिरा। माँ भवानी के सिर से तीन रक्त धाराये निकली। दो धाराओ से दोनों सहचरी रक्त पान कर तृप्त हो गई। तीसरी धारा माँ भवानी स्वंय पान करने लगी। तभी से माँ भवानी के छिन्नमस्तिका रूप का प्रादुर्भाव हुआ। know chhinnamasta jayanti history




माँ छिन्नमस्ता जयंती महत्व know chhinnamasta jayanti history

छिन्नमस्ता जयंती के कुछ दिन पहले से ही भक्त गण तैयारियाँ करने लगते है। माँ के दरबार को पूरी तरह से सजाया जाता है। माँ छिन्नमस्ता जयंती के दिन माँ दुर्गा सप्तशी पाठ का आयोजन किया जाता है। know chhinnamasta jayanti history

जिसमें श्रद्धालु तथा भक्त गण भाग लेते है। इस दिन लंगर भी परोसा जाता है। माँ छिन्नमस्ता को भक्त गण चिंतापुर्णी के नाम से भी पुकारते है। माँ चिन्ताओ को हरण करने वाली है। माँ के दरबार में जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से आता है उसकी हर मुराद अवश्य पूर्ण होती है। know chhinnamasta jayanti history

माँ छिन्नमस्ता की पूजन विधि know chhinnamasta jayanti history

माँ छिन्नमस्ता जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त काल में उठे, स्नान-ध्यान से पवित्र होकर हाथ में लाल पुष्प लेकर व्रत का संकल्प ले। गुप्त नवरात्रि की तरह माँ छिन्नमस्ता की को पूजा करे। गुप्त सिद्धि के लिए माँ दुर्गा के दस महाविद्याओं में माँ छिन्नमस्ता छठी महाविद्या है। माँ छिन्नमस्ता समस्त चिंता, क्लेश, दुःख, कष्ट को हर लेती है। know chhinnamasta jayanti history

माँ की कृपा से विशेष सिद्धि भी पूर्ण होती है। माँ की महिमा अपरम्पार है। अतः व्रती को माँ के विभिन्न रूप तथा महाविद्याओं के प्रादुर्भाव की पूजा विधि-विधान एवम शुद्ध मन से करना चाहिए । इस प्रकार माँ छिन्नमस्ता जयंती की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ छिन्नमस्ता की जय।  know chhinnamasta jayanti history
( प्रवीण कुमार )

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