20 अक्टूबर 2018 को है पापाकुंशा एकादशी, जानिए कथा एवं इतिहास

know devotional Papankusha Ekadashi history



वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापाकुंशा एकादशी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष रविवार 20 अक्टूबर 2018 की तिथि को पापाकुंशा एकादशी मनाई जाएगी। वर्ष के प्रत्येक माह के दोनों पक्षों में एकादशी पर्व मनाई जाती है। पापाकुंशा एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा करने से व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी का स्मरण मात्र से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। know devotional Papankusha Ekadashi history 

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा know devotional Papankusha Ekadashi history 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्राचीन काल में विंध्य पर्वत पर महा क्रूर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहा करता था। जब बहेलिया के जीवन का अंतिम समय आया तो यमराज के दूत उसे लेने आए। know devotional Papankusha Ekadashi history 

यह बात जब बहेलिया को पता चलती है तो बहेलिया मृत्यु से डरकर अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुँच जाता है। आश्रम में अंगिरा ऋषि से विनती करता है। हे ऋषि मैं मृत्यु भवन में नहीं जाना चाहता हूँ। कृपा कर मेरा मार्ग दर्शन प्रशस्त करें। know devotional Papankusha Ekadashi history 

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तत्पश्चात अंगिरा ऋषि ने बहेलिया को आश्विन माह कि शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापाकुंशा एकादशी व्रत को करने की सलाह देते है। ऋषि के आदेशानुसार बहेलिया भगवान विष्णु जी के निम्मित एकादशी व्रत करता है। व्रत के पुण्य प्रभाव से बहेलिया अपने सभी पापों से मुक्त होकर वैकुण्ठ लोक चला जाता है। know devotional Papankusha Ekadashi history 




पापांकुशा एकादशी महत्व know devotional Papankusha Ekadashi history 

शास्त्रों में एकादशी व्रत के महत्व का उल्लेख निहित है। जो मनुष्य एकादशी के दिन व्रत व् उपवास कर भगवान विष्णु जी की पूजा करते है। उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

जो मनुष्य पूर्ण रूप से निराहार उपवास नहीं रख सकते है। उनके लिए मध्यान या संध्या काल में फलाहार करने का विधान है। एकादशी के दिन पूर्ण श्रद्धा-भाव से भगवान विष्णु जी की पूजा करने से प्रभु की कृपा व्रती पर बरसती है। इस दिन दान-दक्षिणा देने का भी प्रावधान है। अतः अपने सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों एवम गरीबों को दान दें। know devotional Papankusha Ekadashi history 

पापाकुंशा एकादशी व्रत विधि know devotional Papankusha Ekadashi history 

एकादशी के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान-ध्यान से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात भगवान विष्णु जी के निम्मित एकादशी व्रत का संकल्प हाथ में पुष्प और अक्षत लेकर करें। व्रत संकल्प के पश्चात घट स्थापना कर भगवान विष्णु जी की प्रतिमूर्ति को कलश पर रखें। know devotional Papankusha Ekadashi history 

इसके साथ भगवान विष्णु जी की पूजा जल, पुष्प, दूर्वा, अक्षत, फल आदि अर्पित कर एकादशी व्रत की कथा का पाठ करें। कथा सम्पन्न होने पर घी से प्रज्वलित दीप से भगवान की आरती उतारें। विधि पूर्वक व्रत करने से व्रती के जीवन में सुख, मंगल और शांति का आगमन होता है। know devotional Papankusha Ekadashi history 

एकादशी व्रत का समापन द्वादशी के दिन होता है। अतः द्वादशी के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा-अर्चना करने के पश्चात ब्राह्मणों को सामर्थ्य अनुसार दान देकर व्रत का समापन करें। इस प्रकार पापकुंशा एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरि विष्णु जी की जय।  know devotional Papankusha Ekadashi history 
( प्रवीण कुमार )

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