23 जुलाई 2018 को है देवशयनी एकादशी,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

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हिन्दू धर्म के अनुसार आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष मंगलवार 23 जुलाई 2018 को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन से चतुर्मास का भी प्रारम्भ होता है तथा इस तिथि से भगववान विष्णु शयन काल में शयन के लिए चले जाते है।

अतः इस व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए। देवशयनी एकादशी को सभी उपवासों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस व्रत को करने से व्रती की सभी मनोकामनाएं पूर्ण एवम प्राप्त होती है। know devshayani ekadashi story & history 

देवशयनी एकादशी व्रत कथा know devshayani ekadashi story & history 

देवशयनी एकादशी के सम्बन्ध में एक पौराणिक कथा प्रचलित है। प्राचीन काल में सूर्यवंशी मान्धाता नामक एक राजा राज करता था। राजा सत्यवादी, प्रतापी, चक्रवती एवम वीर योद्धा था। वह प्रजा को अपनी संतान तुल्य मानता था। एक बार उसके सम्राज्य में अकाल पड़ गया। दुखी प्रजा राजा के पास आकर प्रार्थना करने लगी, राजा इस समस्या के समाधान हेतु अपने सैनिको के साथ वन की और निकल पड़े।




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वन मार्ग में घूमते-घूमते राजा सैनिको के साथ भगवान ब्रह्मा जी के पुत्र ऋषि अंगिरा के आश्रम में पहुंच गये। राजा मान्धाता ने प्रणाम कर उनसे समस्या बताया, तदोपरांत ऋषि अंगिरा ने राजा को कहा, हे राजन। आप देवशयनी एकादशी व्रत को करें इस व्रत के प्रभाव से आपकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। ऋषि अंगिरा के वचनानुसार राजा ने इस व्रत का विधि पूर्वक किया। इस व्रत फल के प्रभाव से प्रजा को संकट से मुक्ति प्राप्त होती है।

देवशयनी एकादशी पौराणिक महत्व know devshayani ekadashi story & history 

पुराणो के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान श्री हरी विष्णु जी चार माह तक पाताल लोक में निवास अर्थात शयन मुद्रा में चले जाते है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भगवान विष्णु जागृत होते है। इन चार माह में भगवान विष्णु जी क्षीर सागर में अनंत शैया पर शयन करते है। अतः इस अवधि में कोई भी धार्मिक कार्य नही किया जाता है। know devshayani ekadashi story & history 

देवशयनी एकादशी पूजा विधि know devshayani ekadashi story & history 

देवशयनी एकादशी व्रत की शरुवात दशमी तिथि से हो जाती है। दशमी के दिन लहसुन, प्याज एवम तामसी भोजन का परित्याग करें। इस दिन सेंधा नमक से पका भोजन ग्रहण करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः काल उठकर दैनिक कार्य से निवृत होकर देवशयनी एकादशी व्रत का संकल्प हाथ में पुष्प, अक्षत आदि लेकर करें।

भगवान विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा विधिवत करना चाहिए। भगवान विष्णु जी को ताम्बूल, पुंगीफल आदि अर्पित करें। दिन में निराहार रहे एवम रात्रि में फलाहार करें। इस प्रकार देवशयनी एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु देव की जय।
( प्रवीण कुमार )

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