29 मार्च 2018 को है जैन धर्म प्रभु महावीर स्वामी जी की जयंती,जानिए जैन धर्म प्रभु महावीर स्वामी जी की जीवनी

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महावीर स्वामी का जन्म ईशा पूर्व 27 मार्च, 598 को मांगलिक प्रभात में वैशाली के गणनायक राजा सिद्धार्थ के घर में हुआ था। शक पंचांग के अनुसार महावीर स्वामी का जन्म चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को फाल्गुनी नक्षत्र में हुआ था। महावीर स्वामी के जन्मदिन पर समस्त भारतवर्ष में महावीर जयंती मनाई जाती है। know god Mahavira swami life story 

महावीर स्वामी एक बार बचपन में अपने मित्रों के साथ वटवृक्ष के ऊपर चढ़कर खेल रहे थे तभी संगम नामक देव ने भयंकर सर्प का रूप धारण कर उनके समक्ष उपस्थित हो गए। सर्प को देखकर महावीर के सारे मित्र भाग गए, किन्तु महावीर जरा भी विचलित नही हुए। संगम देव महावीर के धैर्य तथा साहस को देख अचंभित हो गए। तत्पश्चात, संगम देव ने अपना असली रूप धारण किया और महावीर जी का अभिवादन कर अंतर्ध्यान हो गए। know god Mahavira swami life story 

महावीर स्वामी का तीर्थांकर के रूप में जन्म उनकी पिछले जन्म के सतत साधना का परिणाम था। ऐसा माना जाता है कि महावीर स्वामी ने मुनिराज सागरसेन का दर्शन किया था तथा उनसे ही धर्मोपदेश को धारण किया था। महावीर स्वामी की वास्तविक साधना का मार्ग यही से आरम्भ हुआ था। know god Mahavira swami life story 




भगवान महावीर को शत-शत नमन

महावीर स्वामी 30 वर्ष की अवस्था में एक दिन कर्म बंधन से मुक्त होने तथा तपस्या तथा आत्मचिंतन में लीन हेतु गंभीर विचार करने लगे। इस बात की खबर जब उनके माता-पिता को हुई तो वो चिंतित हो उठें क्योंकि कुछ समय पूर्व ही कलिंग के राजा जितशत्रु ने अपनी सपुत्री यशोदा के साथ वर्धमान के विवाह हेतु प्रस्ताव भेजा था। जिससे राजा सिद्धार्थ को इस प्रस्ताव से बड़ी ख़ुशी हुई थी। उन्होंने अनेकों सपने सजाये थे किन्तु वो सारे सपने बिखरते हुए दिख रहे थे। वर्धमान को उनके माता-पिता ने बहुत समझाया परन्तु वर्धमान अपने मुक्ति के मार्ग से अविचलित नही हुए। know god Mahavira swami life story 

अंततः वर्धमान के माता-पिता ने उन्हें मोक्ष मार्ग की स्वीकृति दे दी। ईशा पूर्व 29 दिसंबर 569 को वर्धमान मुनि दीक्षा लेकर शालवृक्ष के नीचे तपस्या करना आरम्भ कर दिया। उनकी तप साधना बहुत कठिन थी। महावीर स्वामी की तप करने की साधना मौन थी, जब तक उन्हें पूर्ण ज्ञान प्राप्त नही हुआ तब तक उन्होंने किसी को उपदेश नही दिया। महावीर स्वामी को वैसाख माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ। know god Mahavira swami life story 

गौतम उनके प्रथम तथा प्रमुख शिष्य हुए। महावीर स्वामी की धर्मसभा समवसरण कहलायी। समवसरण में मनुष्य, पशु-पक्षी आदि अभी उपस्थित होकर धर्मोपदेश का लाभ लेते थे। महावीर स्वामी ने लगभग 30 वर्ष तक सम्पूर्ण देश में भर्मण कर तत्काल लोकभाषा प्राकृत में उपदेश दिया तथा उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। महावीर स्वामी ने संसार-समुद्र से पार होने के लिए तीर्थ की रचना की। अतः महावीर स्वामी तीर्थंकर कहलाएं। know god Mahavira swami life story 

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महावीर स्वामी ने जगत में यह सन्देश दिया की प्रत्येक आत्मा परमात्मा बन सकता है। उन्होंने कहा कि कर्मो के बंधन के कारण आत्मा का सत्य स्वरूप अभिव्यक्त नही हो पाता है। मनुष्य कर्मो को नाश कर शुद्ध, बुध, निरंजन, तथा सुखरूप को प्राप्त कर सकता है। भगवान महावीर स्वामी अपने जीवन के अंतिम समय में मल्लों की राजधानी पावा पहुंचे। महावीर स्वामी कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन अर्थात ईशा पूर्व 15 अक्टूबर 527 को 72 वर्ष की आयु में निर्वाण को प्राप्त किया। भगवान महावीर को शत-शत नमन।  know god Mahavira swami life story 
( प्रवीण कुमार )

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