19 जुलाई 2017 को है कामिका एकादशी,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

know kamika ekadashi story



कामिका एकादशी का व्रत श्रावण माह के कृष्ण पक्ष के एकादशी दिन मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष कामिका एकादशी बुधवार 19 जुलाई 2017 को मनाई जाएगी। इस व्रत के प्रभाव से जीवात्मा को पापो से मुक्ति मिलती है। इस एकादशी की कथा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण जी ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। इस कथा स्वरण से उन्हें समस्त पापों से मुक्ति एवम मोक्ष प्राप्त हुआ था। know kamika ekadashi story 




कामिका एकादशी कथा know kamika ekadashi story

प्राचीन काल में किसी गाँव में एक ठाकुर रहा करता था। ठाकुर बड़ा ही क्रूर तथा क्रोधी स्वभाव का व्यक्ति था। एक बार आवेश में आकर ठाकुर ने एक ब्राह्मण की हत्या कर दी। किन्तु क्रोध कम होने के पश्चात ठाकुर अपने अपराध हेतु ब्राह्मणो से क्षमा याचना करने लगा। किन्तु ब्राह्मण समज ने उसके क्षमा याचना को स्वीकार नही किया। know kamika ekadashi story 

देवशयनी एकादशी की कथा एवम इतिहास

तत्पश्चात ठाकुर ने गाँव से दूर स्थित भगवान विष्णु जी के मंदिर पुजारी से अपनी व्यथा सुनाई। पुजारी ने ठाकुर के विनम्र भाव को सहजता स्वीकार कर कहा, जो हो गया सो हो गया। किन्तु यदि तुम अब अपने पाप का प्रायश्चित करना चाहते हो तो कामिका एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करों। know kamika ekadashi story

भगवान विष्णु जी की कृपा से तुम्हें इस पाप से अवश्य मुक्ति मिलेगी। मंदिर के पुजारी के वचनानुसार ठाकुर कामिका एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करता है। ठाकुर जब एकादशी की रात्रि में मंदिर में सोया रहता था तभी उसे स्वप्न में भगवान श्री हरि विष्णु जी दर्शन देते है तथा उसके पापो को दूर करने का क्षमा दान देते है। know kamika ekadashi story 

कामिका एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी की पूजा करने से अमोघ फलों की प्राप्ति होती है। इस एकादशी की कथा सुनने मात्र से यज्ञ करने के समान फल प्राप्त होता है। जो व्रती कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा तुलसी पत्र से करता है उसके जीवन भर के पाप का नाश होता है। इस दिन दान करने का भी प्रावधान है। जो मनुष्य इस दिन दान-पुण्य करता है। उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है एवम उनके पितरो को कष्ट दूर होते है। know kamika ekadashi story 

कामिका एकादशी पूजा-विधि know kamika ekadashi story 

कामिका एकादशी के दिन स्नान आदि से निवृत होने के पश्चात व्रत का संकल्प करें। भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, तिल, पंचामृत आदि से करना चाहिए। इस दिन निराहार उपवास करें। संध्या आरती के पश्चात फलाहार करें।
द्वादशी के दिन ब्राह्मणो को भोजन कराने के पश्चात उपवास व्रत को खोले। इस प्रकार कामिका एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भवन श्री हरी विष्णु जी की जय। know kamika ekadashi story 
( प्रवीण कुमार )

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