27 जुलाई 2018 को मनाई जाएगी कोकिला व्रत,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

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वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार जब मलमास आषाढ़ माह में आता है तो इसे कोकिला अधिक मास कहते है। हिन्दू धर्म में कोकिला अधिकमास का विशेष महत्व है। इस व्रत को विशेष कर कुमारी कन्या सुयोग्य पति की कामना के लिए करती है। इस वर्ष कोकिला व्रत शनिवार 27 जुलाई 2018 को मनाई जाएगी। इस व्रत के प्रभाव से व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। know kokila vrat story 

कोकिला व्रत की कथा know kokila vrat story 

पौराणिक कथानुसार जब देवो के राजा दक्ष की बेटी सती अपने पिता के अनुमति के खिलाफ भगवान शिव जी से विवाह कर लेती है। जिस कारण राजा दक्ष बेटी सती से नाराज हो जाते है। राजा दक्ष भगवान शिव जी के रहन-सहन से घृणा करते थे। know kokila vrat story 

उनको भगवान शिव जी पसंद नहीं थे। इसी कारण राजा दक्ष बेटी सती से सभी सम्बन्ध तोड़ लेते है। एक बार राजा दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ किया जिसमें सभी देव गण एवम देवी को आमंत्रित किया लेकिन भगवान शिव जी और देवी सती को इस यज्ञ में आमंत्रित नही किया गया । know kokila vrat story 

भगवान शिव जी माँ सती को बिना बुलाये ना जाने को कहते है। किन्तु माँ सती उस यज्ञ में शामिल होने अपने पिता के घर पर पहुंच जाती है। इस यज्ञ में माँ सती तथा भगवान शिव जी को अपमानित किया जाता है। इस कारण माँ सती क्रोध में आकर यज्ञ कुण्ड में अपने शरीर का त्याग कर देती है।




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भगववान शिव जी के मना करने के पश्चात यज्ञ में शामिल होने के कारण क्रोध में आकर माँ भगवान शिव जी उन्हें कोकिला बनने का श्राप देते है। इस प्रकार माँ सती कोकिला बन 10 हजार वर्षो तक भटकती रहती है। इसके पश्चात माँ सती को श्राप से मुक्ति मिलती है। अगले जन्म में माँ सती पार्वती का रूप लेकर पुनः अवतरित होती है। know kokila vrat story 

इस जन्म में माँ पार्वती कोकिला व्रत को करती है। व्रत के प्रभाव से माँ पार्वती का विवाह भगवान शिव जी से होती है। अतः यह व्रत कुमारी कन्या के लिए अति फलदायी है। know kokila vrat story 

कोकिला व्रत विधि know kokila vrat story 

इस दिन सूर्योदय काल से पूर्व उठें, तथा सूर्योदय से पूर्व दैनिक कार्य से निवृत होकर स्नान कर लेना चाहिए। तत्पश्चात पीपल वृक्ष या आवला वृक्ष के सान्निध्य में भगवान शिव जी एवम माँ पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करना चाहिए। know kokila vrat story 

भगवान की पूजा जल, पुष्प, बेलपत्र, दूर्वा, धुप,दीप आदि से करें। इस दिन निराहार व्रत करना चाहिए। सूर्यास्त के पश्चात आरती-अर्चना करने के पश्चात फलाहार करना चाहिए। इस व्रत को विवाहित नारियाँ के साथ-साथ कुमारी कन्याएँ भी कर सकती है। इस प्रकार कोकिला व्रत की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए। भगवान शिव जी एवम माँ पार्वती की जय।  know kokila vrat story 
( प्रवीण कुमार )

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