15 जनवरी 2018 को है माघ बिहू ,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

know maagh bihu devotional vrat katha




मकर संक्रांति माघ माह में शुक्ल पक्ष की षष्टी को मनाया जाता है और इसी दिन पूर्व भारत के असम राज्य में बिहू पर्व मनाया जाता है जिसे माघ बिहू भी कहते है। असम राज्य में तीन प्रकार की बिहू मनाया जाता है जिसमे माघ बिहू फसल पकने के ख़ुशी में मनाया जाता है। इस वर्ष सोमवार 15 जनवरी 2018 को माघ बिहू मनाया जायेगा ।  know maagh bihu devotional vrat katha 




लोग माघ बिहू को धूमधाम से मनाते है

माघ बिहू के एक दिन पूर्व असम के लोग उरुका पर्व मनाते है। इस दिन लोग पवित्र नदियों और सरोवरों के तट पर धान की पुआल से अस्थाई छावनी बनाते है। जिसे असम के लोग भेलाघर कहते है। उरुका की रात्रि में गाँव के सभी लोग भेलाघर पर भोज का आयोजन करते है। know maagh bihu devotional vrat katha 

भेलाघर के पास चार बांस लगाकर उस पर पुआल एवं लकड़ी से ऊँचे गुम्बद बनाये जाते है। जिसे असम की भाषा में मेजी कहा जाता है। माघ बिहू के दिन गाँव के लोग सुबह में स्नान करके मेजी जलाकर माघ बिहू पर्व का शुभारम्भ करते है और इस अग्नि के चारो ओर एकत्र होकर भगवान से शुभ और मंगल की कामना करते है। लोग अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए जलते हुए मेजी में विभिन्न वस्तुए भेंट चढ़ाते है और मेजी जलने के पश्चात उसके भस्म या राख को खेतो में छिड़का जाता है। know maagh bihu devotional vrat katha 

होली की कथा एवं इतिहास

लोगो का मानना है कि ऐसा करने से खेतो की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। माघ बिहू के दौरान लोग अपनी ख़ुशी का इजहार नाच-गान आदि से करते है। माघ बिहू को असम के कुछेक स्थानो में भोगाली बिहू भी कहा जाता है। माघ महीने में तिल, चावल, गन्ना आदि फैसले पकते है और इन्ही फसल से खाद्य पदार्थ बनाया और खिलाया जाता है। अतः लोग माघ बिहू को धूमधाम से मनाते है।  know maagh bihu devotional vrat katha 
( प्रवीण कुमार )

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