30 सितंबर 2017 को है मध्वाचार्य की जीवनी

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मध्वाचार्य जी का जन्म 1238 ई में हुआ था। ये तत्काल भारत में भक्ति आंदोलन के महत्वपूर्ण दार्शनिकों में से एक थे। मध्वाचार्य जी आनन्दतीर्थ और पूर्णप्रज्ञ के नाम से प्रसिद्ध है। जबकि मध्वाचार्य जी तत्ववाद के प्रवर्तक थे। जिसे द्वैतवाद भी कहा जाता है। वेदांत के तीन प्रमुख दर्शनों में दवैतवाद एक है। धार्मिक मान्यता अनुसार मध्वाचार्य जी को वायु देव का तृतीय अवतार माना जाता है। .वायु देव के अन्य दो अवतार क्रमशः भीम तथा हनुमान जी है।इस वर्ष शनिवार 30 सितंबर 2017 को माधवाचार्य जयंती मनाई जाएगी।  know Madhvacharya life story

मध्वाचार्य जी तत्काल समय के अग्रदूत माने जाते थे। वे कई बार समाज में प्रचलित रीतियों के खिलाफ गए। इन्होनें ही द्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया और द्वैत दर्शन के ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखा। इस वेदांत के व्याख्यान के लिए इन्होनें एक स्वतंत्र ग्रन्थ अनुव्याख्यान भी लिखा। गीता और उपनिषदों पर टीकाएँ, श्रीमद्भागवतपुराण पर टीका तथा महाभारततात्पर्यनिर्णय टीका आदि इनके अन्य ग्रन्थ है।  know Madhvacharya life story 

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मध्वाचार्य जी का जन्म 1238 ई में दक्षिण कन्नड़ जिले के उड्डप्पी शिवल्ली नमक स्थान के पास पाजक गाँव में हुआ। बाल्यावस्था में ही ये वेद और वेदांगों के प्रख्यात ज्ञाता हुए। सत्य का ज्ञान प्राप्त करने के इन्होने सन्यास लिया। सन्यास के पश्चात इनका अधिकांस समय पूजा, ध्यान, अध्ययन व् शास्त्रचर्चा में बीतता था।  know Madhvacharya life story 

महान दार्शनिक मध्वाचार्य जी को शत शत नमन

शंकर मत के अनुयायी आचार्य अच्युतप्रेक्ष जी से इन्होने विद्या ग्रहण की तथा गुरु से प्राप्त ज्ञान को इन्होनें अपना एक अलग मत बनाया जिसे “द्वैत दर्शन” कहते हैं। मध्वाचार्य जी के अनुसार भगवान विष्णु जी ही परमात्मा है। आचार्य रामानुज जी की तरह इन्होने भगवान श्री विष्णु जी के शंख, चक्र, पद्म के चिन्हों से अपने अंगों को अलंकृत करने की प्रथा का समर्थन किया।  know Madhvacharya life story 

देश के विभिन्न भागों में इनके अनेक अनुयायी बने। मध्वाचार्य जी ने उड्डप्पी में भगवान श्री कृष्ण जी के मंदिर की स्थापना की। जो इनके सारे अनुयायियों के लिए तीर्थ स्थान बन गया। इन्होनें ही यज्ञों में पशुबलि बंद कराने का समाजिक सुधार किया। इनके प्रयाशों से पशुबलि प्रथा पर रोक लग सकी। मध्वाचार्य जी 79 वर्ष की अवस्था में सन 1317 ई में ब्रह्म तत्व में विलीन हो गए। इनके जीवन के संबंध में यथातथ्य विवरण उपस्थित नहीं किया जा सकता। द्वैत दर्शन के रचयिता तथा भक्ति काल के महान दार्शनिक मध्वाचार्य जी को शत शत नमन  know Madhvacharya life story 
( प्रवीण कुमार )

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