5 अक्टूबर 2017 को है महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती ,जानिए महर्षि वाल्मीकि जी की जीवनी

know maharshi valmiki life story



वैदिक काल में महान ऋषियों में प्रमुख स्थान प्राप्त करने वालों में महर्षि वाल्मीकि क भी स्थान आता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आश्विन माह की पूर्णिमा को महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। इनके पिता जी का नाम वरुण देव थे। तदनुसार इस वर्ष गुरुवार 5 अक्टूबर 2017 को महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। इन्होनें संस्कृत भाषा का महान ग्रन्थ रामायण की रचना की थी। know maharshi valmiki life story 

धार्मिक मान्यता अनुसार एक बार जब वाल्मीकि जी ध्यान में बैठे थे तो इनके शरीर को दीमकों ने ढूह बनाकर ढक लिया था। जब वाल्मीकि जी ने साधना पूरी कर ली तो वाल्मीकि जी ढूह से बाहर निकले। जिसे वाल्मीकि कहते है। उसी समय से इन्हें वाल्मीकि जी कहा जाने लगा।  know maharshi valmiki life story 




महर्षि वाल्मीकी का जीवन चरित्र know maharshi valmiki life story 

पौराणिक मान्यता अनुसार वाल्मीकि जी पूर्व में रत्नाकर के नाम से जाने जाते थे। रत्नाकर परिवार के पालन हेतु अत्याचार करते थे। एक बार रत्नाकर को वन में नारद जी मिले तो रत्नाकर ने नारद जी को लूटने का प्रयास किया। उस समय नारद जी ने रत्नाकर से पूछा कि तुम यह कार्य क्यों और किस लिए करते हो। know maharshi valmiki life story 

रत्नाकर ने जबाब दिया कि अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए ये सब कार्य करता हूँ। इस पर नारद जी रत्नाकर से प्रश्न किया कि तुम जो अपराध करते हो। क्या इस पाप में तुम्हारे पापों का भागीदार परिवार वालें बनेगें। नारद जी की यह बात सुनकर रत्नाकर स्तब्ध रह गया। know maharshi valmiki life story 

तत्पश्चात नारद जी ने कहा कि हे रत्नाकर यदि तुम्हारे परिवार वाले इस कार्य में तुम्हारे भागीदार नहीं बन सकते है तो फिर क्यों परिवार के लिए यह पाप करते हो। नारद जी को बातों को सुनकर रत्नाकर नारद जी के चरण पकड़ लिए और उसी समय संकल्प लिया कि वो अब हिंसा नहीं करेगा।

विवाह पंचमी की कथा एवं इतिहास

रत्नाकर डाकू का जीवन त्याग कर तप में लीन हो गया। नारद जी ने जब आत्म ज्ञान और सत्य का साक्षात्कार कराया तो उन्हें राम-नाम के जप का उपदेश दिया था। किन्तु रत्नाकर राम-नाम का उच्चारण नहीं कर पाता था। तब नारद जी ने रत्नाकर को मरा-मरा जपने के लिए कहा और मरा रटते-रटते ये शब्द ही राम बन गया। रत्नाकर निरंतर जप करते-करते ऋषि वाल्मीकि बन गए। know maharshi valmiki life story 

वाल्मीकि रामायण know maharshi valmiki life story 

शास्त्रों के अनुसार एक बार महर्षि वाल्मीकि जी नदी के किनारे क्रौंच पक्षी को देख रहे थे, क्रौंच का जोड़ा प्रेमालाप में लीन था। उसी समय एक व्याध ने क्रौंच पक्षी के एक जोड़े में से एक को मार दिया, मादा पक्षी व्यथित होकर विलाप करने लगती है। मादा क्रौंच के विलाप को सुनकर सहसा वाल्मीकि जी के मुख से स्वतः एक श्लोक फुट पड़ा।
ही मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्।।
यही श्लोक महाकाव्य रामायण रचना का आधार बना। know maharshi valmiki life story 

महर्षि वाल्मीकि जयंती महोत्सव know maharshi valmiki life story 

वाल्मीकि जयंती देश भर में बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों को सजाया जाता है तथा पूजा अर्चना की जाती है। कई जगहों पर शोभा यात्रा का भी आयोजन किया जाता है। पूजा और शोभा यात्रा में लोग बड़े ही उत्साह से भाग लेते है। महर्षि वाल्मीकि जी को लोग याद करते है तथा उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते है। कई जगहों पर रामायण पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। संस्कृत के ज्ञाता और रामयण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जी को शत-शत नमन।  know maharshi valmiki life story 
( प्रवीण कुमार )

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