7 मई 2017 को है परशुराम द्वादशी,जानिए कथा एवम इतिहास

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हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को परशुराम द्वादशी मनाई जाती है। तदानुसार इस वर्ष रविवार 7 मई 2017 को परशुराम द्वादशी मनाई जाएगी। भगवान परशुराम अधर्म के संहार हेतु इस पृथ्वी पर प्रकट हुए थे तथा उन्होंने इक्कीस बार क्षत्रिय वंश का वध किया था। इस दिन पुरे देश में परशुराम जी की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान परशुराम की कृपा से व्रती के समस्त दुखों का नाश होता है। know parshuram dwadashi history 

परशुराम जन्म कथा know parshuram dwadashi history 

हिन्दू धार्मिक पुराणो के अनुसार पौराणिक काल में महिष्मती नगर में हैयतवंशी क्षत्रिय नरेश सहस्त्रबाहु का शासन था। राजा सहस्त्रबाहु अत्यंत क्रूर तथा अत्याचारी था जिससे आम जनता हमेशा कुंठित रहता था। जब राजा का अत्याचार बहुत बढ़ गया तब माता पृथ्वी भगवान विष्णु जी के पास गई तथा उनसे राजा सहस्त्रबाहु के अत्याचारों को नाश करने का आग्रह किया। know parshuram dwadashi history 

मोहिनी एकादशी की कथा एवम इतिहास

तत्पश्चात भगवान विष्णु जी ने माता पृथ्वी को वचन दिया की जब-जब धर्म का पतन होता है तो मैं अवश्य प्रकट होता हूँ। अतः धर्म कि स्थापना के लिए मैं महर्षि जमदगिन के घर पर पुत्र रूप में अवतार लेकर अत्याचारियो का सर्वनाश करूंगा। कुछ समय पश्चात भगवान विष्णु जी परशुराम रूप में अवतरित होते है और । know parshuram dwadashi history 

भगवान परशुराम ने क्षत्रिय के नरेश सहस्त्रबाहु का वध कर पृथ्वी लोक को पापियो के पापो से मुक्त करते है। भगवान परशुराम जी के क्रोध को महर्षि ऋचीक ने शांत किया तथा उनसे दान में पृथ्वी मांग लिया। भगवान परशुराम जी वचनानुसार मह्रिषी ऋचीक को दान में पृथ्वी देकर स्वंय महेंद्र पर्वत पर निवास करने चले गए। know parshuram dwadashi history 




भगवान परशुराम द्वादशी महत्व know parshuram dwadashi history 

भगवान परशुराम जी शास्त्र एवम शस्त्र विद्या के पंडित थे तथा प्राणी मात्र का हित करना ही उनका परम लक्ष्य रहा है। उनकी उपासना से दुखियो, शोषितो, तथा पीड़ितों को हर प्रकार से मुक्ति मिलती है। know parshuram dwadashi history 

भगवान परशुराम पूजन विधि know parshuram dwadashi history c

इस तिथि को सूर्योंदय काल में उठे, स्नान-ध्यान से निवृत होकर व्रत का संकल्प ले। तत्पश्चात भगवान विष्णु जी की पूजा करे। इस दिन व्रती को निराहार रहना चाहिए। संध्या काल में आरती-अर्चना करने के पश्चात फलाहार करे। अगले दिन पूजा-पाठ के पश्चात भोजन ग्रहण करें। इस प्रकार भगवान परशुराम द्वादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान परशुराम जी की जय। know parshuram dwadashi history 
( प्रवीण कुमार )

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