17 फरवरी 2018 को रामकृष्ण परमहंस जयंती है , जानिए रामकृष्ण जी की जीवनी

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भारत के महान संत एवम आधुनिक काल के महान विचारक रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म फाल्गुन माह में 18 फरवरी 1838 ई को बंगाल राज्य के कामारपुकुर में हुआ था। इनके पिता का नाम खुदीराम तथा माता का नाम चंद्रमणि देवी था। रामकृष्ण जी के बचपन का नाम गदाधर था। रामकृष्ण जी के अनन्य भक्तो के अनुसार उनके माता-पिता को उनके जन्म से पूर्व ही ईश्वर की अलौकिक घटनाओ तथा दृश्यों का आभास हुआ था। इस वर्ष शनिवार 17 फरवरी 2018 को रामकृष्ण परमहंस जयंती मनाई जाएगी।  know ramkrishna paramhans life story 

उनके पिता खुदीराम ने एक रात स्वप्न में देखा था की भगवान विष्णु ने उन्हें कहा की आपके पुत्र के रूप में जन्म लूंगा। इस तरह का आभास उनकी पत्नी चंद्रमणि देवी को भी हुआ था जब उन्होंने एक बार शिव मंदिर में एक कांतिमय रोशनी को अपने गर्भ में प्रवेश करते हुए देखा था। सात वर्ष की अल्पआयु में ही परमहंस जी के पिता का निधन हो गया। know ramkrishna paramhans life story 

ऐसी विपरीत परिस्थिति में पुरे परिवार का भरण -पोषण कठिन हो गया। परन्तु बालक गदाधर का साहस तथा संघर्ष कम नही हुआ। रामकृष्ण जी के बड़े भाई रामकुमार चट्टोपाध्याय कोलकाता में एक पाठशाला के संचालक थे। रामकुमार ने गदाधर को अपने साथ कोलकाता ले आये। रामकृष्ण जी अंतर्मन से अत्यंत, निश्छल, विनयशील एवम सहज थे। know ramkrishna paramhans life story 



दक्षिणेश्वर आगमन

रामकृष्ण के कठिन प्रयासों के बाबजूद उनका मन अध्यन-अध्यापन में नही लगा। इस अवधि में 1855 ई में रामकुमार दक्षिणेश्वर काली मंदिर ( जोकि रानी रशमोनी द्वारा बनाया गया था ) के प्रमुख पुजारी नियुक्त किये गए। परन्तु ईश्वर की महिमा कुछ और ही था। 1856 ई में रामकुमार का निधन हो गया। रामकुमार के निधन के पश्चात उनके छोटे भाई रामकृष्ण को मंदिर का पुरोहित नियुक्त किया गया।रामकृष्ण का मन यहाँ रम गया। know ramkrishna paramhans life story 

जिस कारण रामकृष्ण काली माता की पूजा में ध्यान-मग्न हो गए। कहा जाता है की रामकृष्ण ने काली माता का दर्शन ब्रह्माण्ड की माता के रूप में किया था। इस क्षण का रामकृष्ण ने स्वंय वर्णन किया था। उनका कहना था कि उस वक्त घर, द्वार, मंदिर, समस्त लोक विलुप्त अवस्था में था।

मेरी नजरो में सारा संसार शून्य मात्र था और इस शून्य में मैंने एक अनंत प्रकाश से आलोकित सागर को देखा, और इस चेतना में मैं जिस दिशा में अपनी दिव्य दृष्टि से देख रहा था मात्र उज्जवल लहरे दिखाई दे रही थी। जो एक-एक कर मेरे तरफ आ रही थी। इस दिन मैंने माता काली का दर्शन किया था। know ramkrishna paramhans life story 

विवाह

रामकृष्ण की अति भक्ति को देख समाज में यह धारणा व्याप्त हो गयी की रामकृष्ण आध्यात्मिक साधना के कारण विक्षिप्त हो गए है तथा उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। तदोपरांत रामकृष्ण की माता एवम बड़े भाई रामेश्वर ने गदाधर अर्थात रामकृष्ण परमहंस का विवाह 1859 में 5 वर्ष की कन्या शरदामणि मुखोपाध्याय के साथ कर दी गयी। विवाह के बाद शारदामणि जयरामबाटी में रहने लगी तथा जब शारदामणि 18 वर्ष की हुई तब शारदामणि अपने पति रामकृष्ण के साथ दक्षिणेश्वर में रहने लगी। परन्तु तब रामकृष्ण सन्यासी जीवन को ग्रहण कर लिया था।  know ramkrishna paramhans life story 

मृत्यु

रामकृष्ण परमहंस अपने जीवन के अंतिम अवस्था में समाधि की स्थिति में जीवन व्यतीत करने लगे। जब शिष्य उनके सेवा का भाव प्रकट करते तो रामकृष्ण हँस कर कहते, की अब भी अज्ञानता का साया दूर नही हुआ है। इनके प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकान्द थे जो आधुनिक काल के युवा पथ -प्रदर्शक है। शिष्य रामकृष्ण को ठाकुर कह कर सम्बोधित करते थे। एक बार विवेकानंद ने गुरु रामकृष्ण से कहा, गुरु आज्ञा हो तो मैं हिमालय पर एकांत अवस्था में तपस्या करने जाऊ तब रामकृष्ण ने कहा चारो ओर अज्ञानता घिरा है, लोग रोते-बिलखते है और तुम हिमालय में आनंद में निमग्न रहना चाहते है, क्या तुम्हारी आत्मा इसकी स्वीकृति देगी। know ramkrishna paramhans life story 

सूर्य ग्रहण की कथा एवं महत्व

इस विचार को सुनने के पश्चात विवेकानंद ने हिमालय तपस्या का त्याग कर दिया। रामकृष्ण महान संत तथा आधुनिक काल के उच्च विचारक एवम साधक थे। रामकृष्ण सेवा को ईश्वर प्राप्ति का पथ मानते थे। समय के साथ वह दिन भी आ गया जब चिकित्सा पद्धति ने उनके गले में सूजन को कैंसर रोग बताया। चिकितसकों ने उन्हें वार्तालाप तथा समाधि लेने से मन किया परन्तु रामकृष्ण मुस्कराते रहे। 16 अगस्त 1886 ई के प्रातः बेला में परमहंस रामकृष्ण ने महासमाधि दवा अपने तन का त्याग कर दिया। महान संत, साधक, उच्च विचारक रामकृष्ण परमहंस को शत-शत नमन।  know ramkrishna paramhans life story 

( प्रवीण कुमार )

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