7 मई 2018 को रवीन्द्रनाथ टैगोर जी की जयंती है, जानिए इनकी जीवनी

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कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर का जन्म कलकत्ता के प्रसिद्ध जोर सांको भवन में 7 मई 1861 ई को हुआ था। इनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर और माता का नाम शारदा देवी था। देवेन्द्रनाथ जी ब्रह्म समाज के नेता थे तथा इनका परिवार कलकत्ता के प्रसिद्ध व् समृद्ध परिवारो में से एक था। रवीन्द्रनाथ अपने भाई-बहन में सबसे छोटे थे। know ravindranath tagore ji life

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रविंद्रनाथ बाल्यकाल से ही अपनी कवि रूप से जाने जाते थे। इनको प्रकृति से अगाध स्नेह एवम प्रेम था। इस कारण इन्हे बचपन से ही कहानियाँ तथा कविता लिखने में रूचि थी। कविवर रविंद्रनाथ टैगोर एक बांग्ला कवि, निबंधकार, चित्रकार, नाटककार, गीतकार, संगीतकार थे। कविवर विद्या के धनी थे। जिस कारण इनकी पहचान ना केवल देश में बल्कि विदेशो में भी बनी। रविंद्रनाथ टैगोर जी को आधुनिक भारत के असाधारण सृजनशील कलाकार माना जाता है। know ravindranath tagore ji life

रवीन्द्रनाथ टैगोर की शिक्षा

कविवर रविंद्रनाथ जी की प्रारम्भिक शिक्षा सेंट जेवियर स्कूल कलकत्ता में हुई। रविन्द्रनाथ के पिता की दिली इच्छा थी की रविन्द्रनाथ बड़े होकर बैरिस्टर बने और इस संदर्भ में उन्होंने उनकी शिक्षा को पूरा करने के लिए 1878 ई में लंदन भेजा। परन्तु रविंद्रनाथ जी का मन वहाँ नही लगा। किसी तरह उन्होंने दो साल लंदन में बिताया। 1880 ई में रविन्द्र नाथ बिना डिग्री लिए लंदन से वापस लौट आए। know ravindranath tagore ji life



रवीन्द्रनाथ टैगोर का साहित्य सृजन

रविंद्रनाथ टैगोर जी ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी विद्याओ का सृजन किया। कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर जी की सबसे लोकप्रिय रचना ‘गीतांजलि’ है जिसके लिए उन्हें 1913 ई में विश्व समुदाय ने नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया। कविवर टैगोर जी विश्व के एकलौते साहित्यकार है जिनके दो रचनाएँ “जन गण मन” और “आमार सोनार बांग्ला” दो देश भारत और बांग्ला देश का राष्ट्रगान बनी है।गीतांजलि इनकी प्रमुख रचना रही जो लोगो को इतनी पसंद आई की यह पुरे विश्व के विभिन्न भाषाओ में प्रकाशित किया गया। इस रचना से कविवर टैगोर जी का नाम समस्त विश्व के कोने-कोने में फ़ैल गया। इनकी लोकप्रिय कहानियाँ काबुलीवाला, मास्टर साहब और पोस्ट मास्टर है जो आज भी लोकप्रिय है। know ravindranath tagore ji life

सामाजिक जीवन

कविवर टैगोर के नेतृत्व में रक्षा बंधन के उत्सव पर 16 अक्टूबर 1905 ई को बंग-भंग आंदोलन का आरम्भ हुआ था। इस आंदोलन से भारत में स्वदेशी आंदोलन का सूत्रपात हुआ। रोलट एक्ट के कारण 1919 ई में अंग्रेजो के द्वारा जलियाँवाला कांड में हजारो लोगो का नरसंहार कर दिया गया था। इस घटना से क्षुब्ध होकर कविवर टैगोर जी ने अंग्रेजो द्वारा प्रदान की गयी नाईट हुड की उपाधि को लौटा दिया था। नाईट हुड का तात्पर्य होता है जब किसी को इस उपाधि से सम्मानित किया जाता है तो उनके नाम के पहले सर लगाया जाता है। 7 अगस्त 1941 ई में बहुमुखी साहित्यकार टैगोर जी का निधन कलकत्ता में हो गया। भारत देश के इस अनमोल रत्न को शत-शत नमन। know ravindranath tagore ji life
( प्रवीण कुमार )

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