श्रावण पूर्णिमा की कथा एवम इतिहास

know sawan purnima history




वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों में श्रावण पूर्णिमा का दिन शुभ व पवित्र माना गया है। इस वर्ष गुरुवार 18 अगस्त 2016 को श्रावण पूर्णिमा मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन पर्व भी बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है। know sawan purnima history 

धार्मिक ग्रंथों में श्रावण पूर्णिमा के दिन तप और दान का उल्लेख वर्णित है। इस दिन उपनयन संस्कार का भी विधान है। भारत भर में प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर संस्कृत दिवस भी मनाया जाता है। know sawan purnima history 

संस्कृत दिवस know sawan purnima history 

भारत भर में प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर संस्कृत दिवस मनाया जाता है। इस दिन ऋषि पर्व भी मनाया जाता है। राज्य तथा जिला स्तरों पर संस्कृत दिवस आयोजित किया जाता है तथा जगह-जगह पर संस्कृत कवि सम्मेलन, लेखक गोष्ठी, छात्रों की भाषण एवम श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता आदि आयोजित किया जाता है। know sawan purnima history 

प्रदोष व्रत की कथा एवम इतिहास

सन 1969 ई में भारत सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के आदेश से केंद्रीय तथा राज्य स्तर पर संस्कृत दिवस मनाने का निर्देश जारी किया था। इस वर्ष से प्रत्येक वर्ष श्रावण पूर्णिमा के दिन भारत में संस्कृत दिवस मनाया जाता है। know sawan purnima history 

प्राचीन काल में आर्य इस दिन से शिक्षण सत्र का प्रारम्भ करते थे और पौष माह की पूर्णिमा को अध्ययन बंद हो जाता था। इसलिए श्रावण माह की पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। know sawan purnima history 




श्रावण पूर्णिमा महत्व know sawan purnima history 

श्रावण पूर्णिमा के दिन पूजा-उपासना करने से चंद्रदोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन जनेऊ धरी स्नान-ध्यान करने के पश्चात धर्मावलम्बी मन, वचन और कर्म की पवित्रता का संकल्प लेकर जनेऊ बदलते है। know sawan purnima history 

इस दिन ब्राह्मणों एवम गरीबों को दान देने से गोदान के समान फल की प्राप्ति होती है। श्रावण पूर्णिमा के दिन भगवान नारायण विष्णु जी और माता लक्ष्मी के दर्शन मात्र से धन,सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान शिव, विष्णु और हनुमान जी की विशेष पूजा करना चाहिए। know sawan purnima history 

श्रावण पूर्णिमा पूजन विधि know sawan purnima history 

श्रावण पूर्णिमा के दिन प्रातः काल उठें, दैनिक कार्य से निवृत होकर संभव हो तो पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। तत्पश्चात भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूजा प्रारम्भ करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव जी, हनुमान जी एवम भगवान विष्णु तथा माँ लक्ष्मी की पूजा करना चाहिए।

पूजा सम्पन्न होने के पश्चात सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों एवम गरीबों को दान देना चाहिए। भगवान श्री हरि विष्णु जी कृपा से सुख, शांति और मंगल का आगमन होता है। इस प्रकार श्रावण पूर्णिमा के महत्व की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान शिव जी की जय।  know sawan purnima history 
( प्रवीण कुमार )

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