28 जुलाई 2018  को है सावन सोमवारी,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

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हिन्दू धर्म के अनुसार प्रत्येक वर्ष का सावन माह भगवान शिवजी एवम माता पार्वती को समर्पित है। सावन माह में सोमवारी व्रत का विशेष महत्व है। इस वर्ष सावन माह का प्रथम सोमवारी व्रत सोमवार 28 जुलाई 2018 को मनाई जाएगी।इस दिन भगवान शिव जी एवम माता पार्वती की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। सावन माह में भारत के सभी द्वादश शिवलिंगो की पूजा अर्चना की जाती है। आदिकाल से सावन माह का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत करने से इच्छित वर की प्राप्ति होती है। know Shravan Somwar vrat story

know Shravan Somwar vrat story सावन सोमवारी की व्रत कथा

कथानुसार एक बार सनत कुमारो ने भगवान महादेव से पूछा, हे देवों के देव महादेव। कृपा कर ये बतायें कि क्यों आपको सावन माह अति प्रिय है। कुमारो के अनुरोध को स्वीकारते हुए भगवान महादेव ने कहा, देवी सती अपनी योगशक्ति के जरिये अपने पिता दक्ष के घर में शरीर त्याग दी थी।
किन्तु देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने की प्रतिज्ञा की थी। इसी वचनानुसार देवी सती का दूसरा जन्म हिमाचल के घर में रानी मैना के गर्भ से हुई थी। उनके माता-पिता ने कन्या का नाम पार्वती रखा। know Shravan Somwar vrat story

know Shravan Somwar vrat story अमरनाथ यात्रा की कथा एवं इतिहास

अमरनाथ यात्रा की कथा एवं इतिहास पार्वती ने सावन के महीने में निराहार रहकर कठोर व्रत कर महदेव को प्रसन्न किया। ततश्चात पार्वती का विवाह महादेव से हुआ। अतः महादेव एवम माता पार्वती को सावन माह अति प्रिय है। यह परम्परा आदि काल से वर्तमान काल तक जारी है। सावन माह में कुंवारी कन्यायें सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए सावन सोमवारी की व्रत रखती है।

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सोमवार की पूजा विधि

स दिन प्रातः काल उठे, स्नान आदि से निवृत होकर भगवान शिवजी, माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी एवम नंदी जी की पूजा करें। पूजा की दिशा पूर्व अथवा उत्तर हो। भगवान शिव जी को पंचामृत से जलधारा स्नान करायें।
ततश्चात भगवान शिव जी की ऊजा गंध, फल, फूल, चन्दन, बेलपत्र, भांग-धतूरा, दूर्वा आदि से करें तथा शिव चालीसा का पाठ एवम ॐ नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करें। अंत में भगवान शिव जी की आरती करें।
शिवजी एवम माता पार्वती से घर परिवार की सुख समृद्धि की कामना करें। इस प्रकार सावन सोमवारी व्रत की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान शिवजी एवम माता पारवती की जय।
( प्रवीण कुमार )

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