20 अप्रैल 2018 को सूरदास जयंती मनाई जाती है,जानिए कृष्ण भक्त सूरदास जी की जीवनी

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सूरदास का जन्म वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को 1478 ई में दिल्ली के समीप सीही नामक गॉव के एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता जी का नाम रामदास था जोकि अपने काल में एक महान गायक थे। सूरदास जी बचपन से ही अंधे थे। परन्तु इनके जन्मान्ध के विषय में मतभेद है। इस वर्ष सूरदास जयंती रविवार 20 अप्रैल  2018 को है।  know surdas life story 

बाल्यकाल know surdas life story 

अपने बाल्यकाल में सूरदास जी आगरा तथा मथुरा के बीच स्थित गऊघाट में आकर रहने लगे थे। ऐसा माना जाता है कि यही पर उनकी मुलाकात श्री वल्लभाचार्य से हुई थी। उनके भक्ति साधना का सहारा पाकर सूरदास जी उनके शिष्य बन गए। श्री वल्लभाचार्य ने सर्वप्रथम सूरदास जी को पुष्टिमार्ग में दीक्षित कर उन्हें कृष्णलीला के पद गाने के लिए मार्ग प्रशस्त किया। सूरदास जी का नाम कृष्ण भक्त कवियों में सर्वप्रथम लिया जाता है। सूरदास जी को हिंदी साहित्य का सूर्य देव माना जाता है। सूरदास जी की प्रमुख रचना सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य-लहरी, नल-दमयंती, ब्याहलो आदि है। know surdas life story 




गीतिकाव्य के रचनाकार सूरदास

सूरदास जी के पिता रामदास एक गायक और संगीतकार थे जिस कारण सूरदास जी बचपन से से ही संगीत में रूचि रखते थे। सूरदास जी ने कृष्ण की नटखट लीलाओ को अपने काव्य रूप में वर्णन किया है।

जानिए आदि गुरु शंकराचार्य जी की जीवनी

इन्होने भगवत गीता के द्वादश स्कन्धों पदो की रचना गीतिकाव्य में की थी। यही पद बाद में सागर कहलाया। कहा जाता है की इनकी प्रसद्धि दूर-दूर तक फैली हुई थी। इनके प्रसद्धि के कारण एक बार मुग़ल शासक इनसे मिलने स्वंय मथुरा घाट पर आ गए थे। know surdas life story 

सूरदास जयंती

सूरदास जी की जयंती पर हिंदी साहित्य के प्रेमी मथुरा घाट, धार्मिक स्थलों, कृष्ण जी के मंदिर में संगोष्ठी करते है। इस दिन स्कूल, कालेजो में सूरदास जी के जीवनी के बारे में छात्रों को बताया जाता है। भगवान कृष्ण जी के भक्त और गायन, लेखन, साहित्य, प्रतिभा के धनी महान भक्त सूरदास जी को शत शत नमन। know surdas life story 
( प्रवीण कुमार )

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