17 अगस्त 2018 को मनाई जाएगी तुलसीदास जैयंती,जानिए तुलसीदास जी की जीवनी

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सम्पूर्ण भारत वर्ष में गोस्वामी तुलसीदास के जन्मदिन पर तुलसी जयंती मनाई जाती है। श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को तुलसी जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष शुक्रवार  17 अगस्त 2018 को मनाई जाएगी। know tulsidas life story 

तुलसीदास जी ने रामभक्ति को सगुण धारा में इस तरह प्रवहित किया जिससे ना केवल तुलसीदास जी कृतार्थ हुए अपितु समस्त हिन्दू समाज उनके सगुण धारा से राम जी के आदर्शों से प्रेरित हुए। गोस्वामी तुलसीदास जी लोक भाषा में राम कथा की रचना की है। know tulsidas life story 

गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म 1532 ई में उत्तर प्रदेश राज्य के बाँदा जिला स्थित राजापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता जी का नाम आत्माराम दुबे तथा माता जी का नाम हुलसी था। know tulsidas life story 

गोस्वामी तुलसीदास का जी बचपन दुःख में बीता। युवा होने पर इनका विवाह रत्नावली जी से हुआ। इनको अपनी पत्नी से अत्यधिक स्नेह, लगाव एवम प्रेम था।तुलसीदास जी को इसी प्रेम के कारण एक बार अपनी पत्नी से फटकार सुनना पड़ा था। प्रेम में पड़े फटकार ने इनकी दिशा और दशा दोनों ही बदल दी। know tulsidas life story 




तुलसीदास जी संस्कृत एवम हिंदी के प्रकांड विद्वान थे know tulsidas life story

तत्पश्चात तुलसीदास जी राम जी की भक्ति में इस प्रकार डूबे कि उनके अनन्य भक्त बन रामचरित मानस ग्रन्थ की रचना कर डाली। तुलसीदास जी भक्ति धारा से जुड़ने के पश्चात इन्होनें गुरु बाबा नरहरिदास जी से दीक्षा प्राप्त किया। know tulsidas life story 

तुलसीदास जी ने अपने जीवन का अधिकांश समय चित्रकूट, अयोध्या एवम काशी में व्यतीत किया। तुलसीदास जी ने अनेक स्थानों पर भर्मण किया। तुलसीदास जी ने अपने जीवन काल में अनेक ग्रंथो की रचना की जिसमें रामचरितमानस को वर्तमान काल में भी भक्ति भाव से पढ़ा जाता है। know tulsidas life story 

तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में भगवान राम जी के चरित्र का अत्यंत मनोहर एवम भक्तिपूर्ण चित्रण को प्रस्तुत किया है। रामचरितमानस में भगवान राम जी के जीवन का वर्णन कवित्त, सवैया, चौपाई आदि छन्दो में तुलसीदास जी ने प्रस्तुत किया है। know tulsidas life story 

कल्कि जयंती की कथा एवम इतिहास

तुलसीदास जी संस्कृत एवम हिंदी के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने रामचरितमानस, बरवै रामायण, रामलला नहछू, हनुमान बाहुक, रामज्ञा प्रशन, संकट मोचन, जानकी मंगल आदि की रचनाएं की। रामचरितमानस के बाद उन्होंने हनुमान चालीसा काव्य धारा की रचना की जो अत्यधिक प्रसिद्ध हुआ। जिसे सभी भक्त गण अति भक्ति भाव से सुनते है। know tulsidas life story 

तुलसीदास जी के समय में समाज में अनेक कुरीतियाँ फैली हुई थी। जिसे दूर करने के लिए तुलसीदास जी ने अपने काव्य रचनाओं द्वारा प्रयास किया। उन्होंने रामराज की परिकल्पना को समाज में स्थापित करने की हिमाकत की। know tulsidas life story 

महात्मा गोस्वामी तुलसीदास जी को शत शत नमन know tulsidas life story

जिसे समाज में कुछ असमाजिक तत्वों ने उनका भरपूर विरोध किया। जिस कारण उनकी समाज में आलोचना भी हुई। किन्तु तुलसीदास जी ने अपनी रचनाओं द्वारा गौ-ब्राह्मण की रक्षा, सगुणवाद एवम प्राचीन संस्कृति के सम्मान को ऊपर उठाने का अथक प्रयाश किया।

वर्तमान समय में भी गोस्वामी तुलसीदास जी को भारत के कोने-कोने में रामलीला के द्वारा उनकी काव्य रचना को प्रस्तुत किया जाता है। जिसे समाज के सभी वर्ग भक्ति भाव से श्रवण करते है। know tulsidas life story 

तुलसीदास जी ने अपना अंतिम समय काशी में व्यतीत किया तथा काशी में स्थित विख्यात असीघाट पर संवत 1623 में श्रावण माह के कृष्ण पक्ष के तृतीया के दिन प्रभु श्री राम जी के नाम का स्मरण करते हुए ब्रह्म तत्व में विलीन हूँ गए। सगुण भक्ति धारा को प्रवहित करने वाले युग महात्मा गोस्वामी तुलसीदास जी को शत शत नमन। know tulsidas life story 
( प्रवीण कुमार )

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