8जनवरी 2018 को स्वामी विवेकानंद जयंती मनाई जाती है ,जानिए स्वामी विवेकानंद जी की जीवनी

know Vivekananda life story




कलकत्ता के एक कायस्थ परिवार में स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 ई में हुआ। इनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था जोकि पेशे से एक वकील थे और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। स्वामी विवेकानंद के पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाई कोर्ट के प्रसिद्ध वकील थे जिस कारण विश्वनाथ दत्त जी पाश्चात्य संस्कृति में अत्यधिक विश्वास रखते थे। इस वर्ष सोमवार 8 जनवरी 2018 को स्वामी विवेकानंद जयंती है।  know Vivekananda life story 

विश्वनाथ दत्त अपने पुत्र स्वामी विवेकानंद जी को भी अंग्रेजी शिक्षा दिलाकर पाश्चात्य देश की संस्कृति के मार्ग पर चलना सिखाना चाहते थे परन्तु, विवेकानन्द की माता भुवनेश्वरी देवी हिन्दू धर्म और संस्कृति में श्रद्धा रखती थी और उनके जिद के कारण स्वामी विवेकानंद की प्रारम्भिक शिक्षा कलकत्ता में प्रारम्भ हुई।स्वामी विवेकानंद जी के बचपन का नाम नरेंद्र दत्त था, नरेंद्र दत्त बचपन से ही प्रतिभा के धनी थे मानो विद्या की देवी सरस्वती उनके इर्द-गिर्द रहती थी। स्वामी विवेकान्द जी को बचपन से भगवान के प्रति अत्यधिक स्नेह और लगाव था। know Vivekananda life story 

स्वामी विवेकानंद की शिक्षा know Vivekananda life story 

1869 में स्वामी विवेकानंद ने 16 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्व विद्यालय के एंट्रेंस एग्जाम में उत्तीर्ण हुए साथ ही कलकत्ता विश्व विद्यालय से उन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। स्नातक शिक्षा के अंतर्गत स्वामी जी नवंबर 1881 ई में परमहंस रामकृष्ण जी से मिले और उनकी आंतरिक अध्यात्म से इतने प्रभावित हुए की उनके प्रमुख शिष्य बन गए। know Vivekananda life story 

स्वामी जी स्नातक उपाधि के पश्चात ब्रह्म समाज से जुड़े यह संस्था हिन्दू धर्म में सुधार के लिए कार्य करती थी परन्तु स्वामी जी यहाँ भी ईश्वर दर्शन की प्रबलता से संतुष्ट नही हुए। स्वामी जी के पिता विश्वनाथ दत्त जी का 1884 ई में निधन हो गया। पिता की मृत्यु के उपरांत परिवार की जिम्मेदारी स्वामी जी पर आ गई। परिवार की स्थिति अति दुर्बल हो गई थी परन्तु स्वामी जी मेहमान के आदर सत्कार में कभी कोई कमी नही आने देते थे स्वंय भूखे रह जाते थे परन्तु किसी को घर से भूखा लौटने नही देते थे। know Vivekananda life story 



गुरु रामकृष्ण से भेंट know Vivekananda life story 

स्वामी विवेकानंद जी नवंबर 1881 ई में परमहंस रामकृष्ण जी से मिले थे तथा उनकी आंतरिक अध्यात्म चिंतन से अत्यधिक प्रभावित हुए। स्वामी विवेकानंद जी की गुरु खोज, परमहंस रामकृष्ण जी के समक्ष समाप्त हुई। यही से स्वामी विवेकानंद जी परमहंस रामकृष्ण जी के शिष्य बन गए। दिव्य महापुरुष रामकृष्ण जी ने स्वामी विवेकनन्द जी की जिंदगी बदल दी। रामकृष्ण जी ने स्वामी जी को विश्वास दिलाया की ईश्वर वास्तव में हमारे बीच विद्यमान है और हम सब ईश्वर को पा सकते है। गुरु रामकृष्ण जी ने स्वामी जी का मार्ग दर्शन किया। उन्हें शिक्षा दी की सेवा कभी दान के रूप में नहीं करना चाहिए बल्कि मानवता में निहित ईश्वर की सेवा करना चाहिए। गुरु जी का यह उपदेश स्वामी जी का मार्ग दर्शन बनी। know Vivekananda life story 

मकरसंक्रांति की कथा और इतिहास

गुरु सेवा के समय में गुरु रामकृष्ण जी ने स्वामी जी को ईश्वर के आदि शक्ति रूप माँ काली का दर्शन कराया था। ऐसा कहा जाता है कि शक्तिघात के कारण कुछ दिनों तक स्वामी जी उन्मत्त अवस्था में रहे परन्तु गुरु द्वारा आत्मदर्शन के कारण स्वामी जी इस पीड़ा से आत्मा को अलग रखा और कुछ दिनों पश्चात स्वामी जी स्वस्थ हो गए।

गुरु रामकृष्ण जी के वचनो को अपना कर्तव्य मानते हुए स्वामी जी ने विवाह नही किया और सन्यासी बन गुरु जी से दीक्षा लिया और नरेंद्र दत्त सन्यासी बनने के पश्चात स्वामी विवेकानंद के रूप में जाने गए। समूचे भारत का स्वामी विवेकानंद जी ने पैदल यात्रा किया। उन्होंने 1 मई 1897 ई में कलकत्ता में रामकृष्ण मिशन और 1898 ई में गंगा नदी के तट पर बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापन की। know Vivekananda life story 

शिकागो धर्म सम्मेलन और स्वामी विवेकनन्द जी know Vivekananda life story 

स्वामी विवेकानंद जी हिन्दू धर्म के उन्नायक, प्रचारक और प्रसारक रहे है जब 1893 ई में अमेरिका के शिकागो शहर में धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया तो उस समय विश्व समुदाय भारत को निम्न दृस्टि से देखती थी। इसके बाबजूद विश्व समुदाय ने भारत को भी इस धर्म सम्मेलन में उपस्थित होने के लिए आमंत्रित किया।

भारत का प्रतिनिधित्व स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका के बहनो और भाइयों से किया जिससे समस्त विश्व के उपस्थित 7000 लोगो ने तालियों से उनका भव्य स्वागत किया और शिकागो सम्मेलन से ही स्वामी जी ने भारत और हिन्दू धर्म को विश्व समुदाय के समक्ष प्रस्तुत किया। शिकागो धर्म सम्मेलन के पश्चात अमेरिका के समाचार पत्र न्यूयॉर्क हेरॉल्ड ने लिखा ईसाई धर्म के लोग मुर्ख है जो भारत जैसे ज्ञानशाली देश में अपने धर्म का प्रचार करते है। know Vivekananda life story 

स्वामी विवेकानंद की रचनाएँ know Vivekananda life story 

स्वामी विवेकानंद जी ने युवा जगत को एक नयी राह दिखाई है उनका प्रभाव युवमानस पर युगो-युगो तक छाया रहेगा। ज्ञानयोग और राजयोग उनकी प्रमुख रचनाएँ है। स्वामी विवेकानंद का कन्याकुमारी में स्थित स्मारक आज भी उनकी महानता को दर्शाता है। know Vivekananda life story 

स्वामी विवेकानंद जी की समाधि know Vivekananda life story 

स्वामी विवेकानंद जी ने युवा मानस में उम्मीद और स्वभामिन को जगाया। समस्त विश्व और खासकर भारतीय युवा को उनके मार्ग दर्शन पर चलने की प्रेरणा लेनी चाहिए तथा उनके दिए गए उपदेशो का पालन करे। स्वामी विवेकानंद जी ने 4 जुलाई 1902 ई को बेलूर के रामकृष्ण मठ में ध्यानावस्था में महासमाधि धारण कर प्राण त्याग दिए। स्वामी विवेकानंद जी जीवन के मात्र 39 वर्ष में जो काम कर गए वो आने वाली पीढ़ियों के युवा के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी। भारतीय युवा के मार्ग प्रशस्ता, नव जागरण के अग्रदूत, महान दार्शनिक,व् चिंतक स्वामी विवेकानंद जी को शत, शत नमन। जय हिन्द, जय भारत।  know Vivekananda life story 
( प्रवीण कुमार )

loading…


You may also like...