16 मार्च 2017 को संकष्टी चतुर्दशी है ,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

march sankashthi chaturthi history





धार्मिक धारणा है की हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा से प्रत्येक शुभ कार्य आरम्भ किया जाता है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। सनातन धर्म में 24 दिन ऐसे होते है जो पूर्णतः भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। अतः वर्ष के हर माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। तदनुसार चैत्र माह में गुरुवार 16 मार्च 2017 को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। march sankashthi chaturthi history 

संकष्टी चतुर्दशी की कथा

शिव रहस्य पुराण के अनुसार भगवन गणेश जी शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव जी एवं माता पार्वती के पुत्र रूप में प्रकट हुए थे। शिव पुराण में कहा गया है कि देवी गिरिजा ने भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए 12 वर्षो तक कठिन तपस्या, व्रत एवं साधना की जिसके फलस्वरूप शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के दिन मध्यान में स्वर्ण कांति से युक्त भगवान गणेश जी प्रकट हुए थे। अतः ब्रह्मा जी ने चतुर्दशी व्रत को अतिश्रेष्ठ व्रत बताया है। march sankashthi chaturthi history 




संकष्टी चतुर्दशी पूजन विधि

वर्ष के प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को संकष्टी चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन संध्याकाल में स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश जी की पुष्प, अक्षत, शुद्ध जल, पंचामृत, धुप से पूजा आराधना करनी चाहिए। आरती तथा पुष्पांजलि अर्पित कर प्रदक्षिणा करनी चाहिए। march sankashthi chaturthi history 

कजरी तीज की कथा एवम इतिहास

पूजा समाप्ति के समय भगवान विघ्नहर्ता से सुख और मंगल की कामना करे। भगवान गणेश भक्तो की सारी मनोकामना पूर्ण करते है। इस दिन संध्याकाल में चन्द्र दर्शन करने के पश्चात भोजन ग्रहण करे। इस तरह संकष्टी चतुर्दशी की कथा सम्पन्न हुई। भक्त गण प्रेम से बोलिए गणपति बप्पा मोरया।  march sankashthi chaturthi history 
( प्रवीण कुमार )

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