2 जनवरी 2018 को पौष पूर्णिमा है ,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

paush purnima vrat katha





वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों के अनुसार वर्ष के प्रत्येक मास में पूर्णिमा व्रत मनाई जाती है।  हिन्दू धर्म के शास्त्रानुसार पौष पूर्णिमा के दिन सूर्य देव को अघ्र्य देकर व नमक रहित व्रत करने से सुख, शांति और सम्पत्ति की प्राप्ति होती है। वर्ष के प्रत्येक पूर्णिमा के दिन हिन्दू धर्म में विशेष पूजा और दान का महत्व है। इस वर्ष मंगलवार 2 जनवरी 2018 को पौष पूर्णिमा मनाई जाएगी। पौष पूर्णिमा की कथा एवं इतिहास paush purnima vrat katha

पौष पूर्णिमा के दिन स्नान और मधुसूदन भगवान की पूजा करने से दिव्यलोक की प्राप्ति होती है paush purnima vrat katha

 

पौष पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण व्रत और पूजा का भी महत्व बताया गया है। इसे करने से भक्तो को अमोघ फल प्राप्त होता है। पौष पूर्णिमा के दिन प्रातः काल स्नानादि से निवृत होकर मधुसूदन भगवान को स्नान कराकर सुन्दर वस्त्रो से सजाकर उन्हें नैवेद्य अर्पित करते हुए पूजा अर्चना करनी चाहिए। पौष पूर्णिमा की कथा एवं इतिहास paush purnima vrat katha




प्रेम से बोलिए भगवान मधुसूदन की जय paush purnima vrat katha

 

पूजन समाप्ति के पश्चात गरीबो को भोजन कराने से सभी मनोकामनाएँ की पूर्ति होती है। शास्त्रो में वर्णित है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पूजा, दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। पौष पूर्णिमा के दिन जगन्नाथ पुरी में भगवान श्री हरि का पुष्याभिषेक किया जाता है। पौष पूर्णिमा की कथा एवं इतिहास paush purnima vrat katha

प्रदोष व्रत की कथा एवं इतिहास paush purnima vrat katha

धार्मिक मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन स्नान और मधुसूदन भगवान की पूजा करने से दिव्यलोक की प्राप्ति होती है. इसी दिन माघ स्नान का आरम्भ होता है। इस तरह पौष पूर्णिमा की कथा एवं महिमा सम्पन्न हुई। भक्त गण प्रेम से बोलिए भगवान मधुसूदन की जय। पौष पूर्णिमा की कथा एवं इतिहास paush purnima vrat katha

( प्रवीण कुमार )

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