9 जनवरी 2018 को है पौष पुत्रदा एकादशी,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

paush putrda ekadashi katha




सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, साल में 24 एकादशी होती है और हर महीने में 2एकादशी होती है। पौष माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी तथा शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते है। तदनुसार, पौष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी सोमवार 9 जनवरी 2018 को पौष पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। paush putrda ekadashi katha 

भगवान श्री कृष्ण जी ने इस एकादशी की कथा, महत्व एवम पूजा विधि युधिष्ठिर को बताया था। इस व्रत के मात्र कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पुत्रदा एकादशी के दिन दीप दान का भी विधान है यह संध्याकाल में किया जाता है। ‘रात को वैष्णव पुरुषों के साथ जागरण कर भगवान विष्णु जी का भजन-कीर्तन करना चाहिए। यह सब पापो को हरनेवाली तथा संतान प्राप्ति का व्रत है और इस सिद्धियों के दाता भगवान विष्णु जी है। paush putrda ekadashi katha 

पुत्रदा एकादशी की कथा paush putrda ekadashi katha 

एक समय की बात है भद्रावतीपुरी राज्य में राजा सुकेतुमान और रानी चंपा राज्य किया करते थे। राजा की कोई संतान ना थी जिस कारण राजा-रानी सदा शोक और चिंता में डूबे रहते थे। राजा हमेशा यह सोचता रहता था की हमारे बाद इस राज का कौन वारिश बनेगा और पितरो को तर्पण कौन करेगा यह सब सोच-सोच कर राजा सुकेतुमान चिंतित रहते थे। एक दिन राजा सुकेतुमान घोड़े पर सवार हो वन में भर्मण करने निकले और वन में दूर निकल गए और इस बात की खबर किसी को ना थी। paush putrda ekadashi katha 



राजा सुकेतुमान उस घने जंगल में भर्मण करने लगे। राह में जंगली जीव उनके इर्द -गिर्द घूम रहे थे, राजा सुकेतुमान वन की शोभा देखने में मग्न हो गए इतने में दोपहर का वक्त हो गया अब राजा सुकेतुमान को भूख और प्यास सताने लगी। राजा सुकेतुमान जल और भोजन की खोज में इधर-उधर भटकने लगे तभी उन्हें एक उत्तम जलाशय दिखाई दिया जिसके समीप मुनियो के ढेर सारे आश्रम थे। राजा सुकेतुमान ने उस आश्रम को देखा वहां कई ऋषि मुनि गण थे तभी राजा सुकेतुमान का दाहिना नेत्र और दाहिना हाथ फड़कने लगा जो शुभ समय की सुचना दे रहा था। paush putrda ekadashi katha 

प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरी विष्णु जी की जय

उस जलाशय के समीप ढेर सरे ऋषि गण वेद का पाठ कर रहे थे यह देखकर राजा सुकेतुमान को बड़ा हर्ष हुआ। यह सब देख राजा सुकेतुमान घोड़े से उतर कर बारी-बारी से ऋषि गण को नमस्कार किया तब मुनि बोले, तथास्तु राजन। राजा सुकेतुमान बोले, आप लोग कौन है और किस उद्देश्य से आपलोग इस जलाशय के समीप एकत्र हुए है ? मुनि बोले, हमलोग विश्वदेव है माघ स्नान के लिए इस जलाशय के समीप आये है आज से पांच दिन बाद माघ स्नान प्रारम्भ हो जायेगा। paush putrda ekadashi katha 

मासिक कार्तिगाई की कथा एवं इतिहास

आज पौष पुत्रदा एकादशी है इस व्रत के करने से पिता को पुत्र की प्राप्ति होती है। राजा सुकेतुमान ने मुनियो से इस व्रत के करने की विधि के बारे में पूछा। मुनि बोले, इस व्रत को करने से भगवान केशव प्रसन्न होते है और केशव भक्ति से प्रसन्न हो आपको अवश्य पुत्र प्राप्ति का वर देंगे। भगवान कृष्ण जी कहते है इस प्रकार राजा सुकेतुमान ने मुनियो को प्रणाम कर अपने राज्य को वापस आ गया और ऋषियों के कथानुसार विधिपूर्वक पुत्रदा एकादशी का अनुष्ठान किया और द्वादशी को पारण कर व्रत को समाप्त किया। एक साल के उपरांत राजा सुकेतुमान के घर में एक नन्हे से राजकुमार का आगमन हुआ जो आगे चलकर भद्रावतीपुरी राज्य का राजा बना। भगवान श्री कृष्ण जी कहते है, राजन पुत्रदा एकादशी का व्रत उत्तम फल देने वाला होता है। paush putrda ekadashi katha 

पौष पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि और महत्व paush putrda ekadashi katha 

भगवान कृष्ण ने पुत्रदा एकादशी के महत्व को बताया की इस व्रत के देवता नारायण हरी श्री विष्णु जी है जिस व्यक्ति को संतान सुख की इच्छा रहता है उसे पौष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करना चाहिए। व्रतधारी को एक दिन पूर्व अर्थात शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन लहसुन,प्याज से रहित भोजन ग्रहण करना चाहिए। एकादशी के दिन स्नान आदि से निवृत होकर विधि-विधान से पूजा करना चाहिए तथा संध्याकाल में दीप दान करना चाहिए इससे श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है। जो भक्त इस व्रत को करते है उन्हें दिन भर निराहार रहना चाहिए तथा संध्याकाल में चाहे तो फलाहार कर सकते है। इस तरह पौष पुत्रदा एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। भक्तगण प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरी विष्णु जी की जय।  paush putrda ekadashi katha 
( प्रवीण कुमार )

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