27 जून  2017 को है विनायक चतुर्दशी,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

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धार्मिक धारणा है की हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा से प्रत्येक शुभ कार्य आरम्भ किया जाता है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। सनातन धर्म में 24 दिन ऐसे होते है जो पूर्णतः भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। vinayak chaturdashi story

अतः वर्ष की हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। तदनुसार आषाढ़ माह में मंगलवार 27 जून  2017 को विनायक चतुर्दशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है।vinayak chaturdashi story



विनायक चतुर्दशी की कथा vinayak chaturdashi story

शिव रहस्य पुराण के अनुसार भगवन गणेश जी शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव जी एवं माता पार्वती के पुत्र रूप में प्रकट हुए थे। शिव पुराण में कहा गया है कि देवी गिरिजा ने भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए 12 वर्षो तक कठिन तपस्या, व्रत एवं साधना किया जिसके फलस्वरूप कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मध्यान में स्वर्ण कांति से युक्त भगवान गणेश जी प्रकट हुए थे। अतः ब्रह्मा जी ने चतुर्दशी व्रत को अतिश्रेष्ठ व्रत बताया है। vinayak chaturdashi story

विनायक चतुर्दशी पूजन विधि vinayak chaturdashi story

वर्ष के प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को संकष्ट चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन संध्याकाल में स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश जी की पुष्प, अक्षत, शुद्ध जल, पंचामृत, धुव से पूजा आराधना करना चाहिए। आरती तथा पुष्पांजलि अर्पित कर प्रदक्षिणा करना चाहिए।

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पूजा समाप्ति के समय भगवान विघ्नहर्ता से सुख और मंगल की कामना करे। भगवान गणेश भक्तो की सारी मनोकामना पूर्ण करते है। इस दिन संध्याकाल में चन्द्र दर्शन करने के पश्चात भोजन ग्रहण करे। इस तरह संकष्टी चतुर्दशी की कथा सम्पन्न हुयी। भक्त गण प्रेम से बोलिए गणपति बप्पा मोरया। संकष्टी चतुर्दशी की कथा एवं इतिहास know vinayak chaturdashi story
( प्रवीण कुमार )

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