विनायक चतुर्थी की कथा एवं इतिहास

Vinayaka Chaturthi vrat katha


धार्मिक धारणा है की हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा से प्रत्येक शुभ कार्य आरम्भ किया जाता है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। सनातन धर्म में 24 दिन ऐसे होते है जो पूर्णतः भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। Vinayaka Chaturthi vrat katha 

संकष्टी चतुर्दशी की कथा एवं इतिहास

अतः वर्ष की हर माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। तदनुसार पौष माह में गुरुवार 22 दिसंबर को विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। Vinayaka Chaturthi vrat katha 




विनायक चतुर्थी की कथा Vinayaka Chaturthi vrat katha 

शिव रहस्य पुराण के अनुसार भगवन गणेश जी शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव जी एवं माता पार्वती के पुत्र रूप में प्रकट हुए थे। शिव पुराण में कहा गया है कि देवी गिरिजा ने भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए 12 वर्षो तक कठिन तपस्या, व्रत एवं साधना किया जिसके फलस्वरूप कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मध्यान में स्वर्ण कांति से युक्त भगवान गणेश जी प्रकट हुए थे। अतः ब्रह्मा जी ने चतुर्दशी व्रत को अतिश्रेष्ठ व्रत बताया है। Vinayaka Chaturthi vrat katha 

विनायक चतुर्थी पूजन विधि Vinayaka Chaturthi vrat katha

वर्ष के प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को संकष्टी और विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन संध्याकाल में स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश जी की पुष्प, अक्षत, शुद्ध जल, पंचामृत, धुव से पूजा आराधना करना चाहिए। आरती तथा पुष्पांजलि अर्पित कर प्रदक्षिणा करना चाहिए। पूजा समाप्ति के समय भगवान विघ्नहर्ता से सुख और मंगल की कामना करे। Vinayaka Chaturthi vrat katha 

भगवान गणेश भक्तो की सारी मनोकामना पूर्ण करते है। इस दिन संध्याकाल में चन्द्र दर्शन करने के पश्चात भोजन ग्रहण करे। इस तरह विनायक चतुर्थी की कथा सम्पन्न हुयी। भक्त गण प्रेम से बोलिए गणपति बप्पा मोरया।  Vinayaka Chaturthi vrat katha 
( प्रवीण कुमार )

loading…


You may also like...