3 दिसंबर 2017 को है अन्नपूर्णा जयंती,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional Annpurna jayanti history




मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को समस्त हिन्दू धर्म के लोग माँ अन्नपूर्णा जयंती मनाते है। ऐसी मान्यता है की जब पृथ्वी पर अन्न की कमी हो गयी थी। तब माँ पार्वती जी अन्नपूर्णा देवी के रूप में अवतरित हो समस्त मानव जाति कीं रक्षा की था जिस कारण मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा तथा त्रिपुरा भैरवी जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन दान का विशेष महत्व है। इस वर्ष रविवार 3 दिसंबर 2017 को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाएगी।  devotional Annpurna jayanti history

माँ अन्नपूर्णा जी उत्पति की कथा । devotional Annpurna jayanti history 

पुराणो के अनुसार एक बार जब पृथ्वी लोक पर पानी और अन्न समाप्त होने लगा तो  जनमानस में हाहाकार मच गया।  पृथ्वी वासी भगवान ब्रह्मा और विष्णु जी की स्तुति करने लगे।  ऋषियों और मुनियो ने वैकुण्ठ लोक और ब्रह्म लोक जाकर भगवान ब्रह्मा जी तथा भगवान विष्णु जी को इस संकट से अवगत कराया।  तत्पश्चात भगवान ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु जी समस्त ऋषि और मुनियो के साथ कैलाश पहुंचे। devotional Annpurna jayanti history 

भगवान ब्रह्मा जी और विष्णु जी ने भगवान शिव जी की आराधना करते हुए कहा, जागिए महादेव, पुकार सुन महदेव जी योग मुद्रा से प्राकृत अवस्था में आये। तब भगवान शिव जी ने समस्त लोगो का अभिवादन करते हुए कहा, कृपा कर आपलोग अपने उद्देश्य को बताये।  भगवान ब्रह्मा जी बोले, प्रभु पृथ्वी पर अन्न और जल की कमी हो गयी है। कुछ कीजिये भगवान। भगवान शिव जी ने देवताओं को आश्वसन दिया सब कुछ यथावत हो जायेगा कृपाकर आपलोग शांति बनाये रखे। devotional Annpurna jayanti history 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा की कथा एवं महत्व




तत्पश्चात , भगवान शिव जी ने पृथ्वी का भर्मण किया।  माता पार्वती जी ने अन्नपूर्णा रूप को ग्रहण किया तथा भगवान शिव जी ने भिक्षु का रूप ग्रहण किया। तब भगवान शिव जी ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा ले पृथ्वी वासी में वितरित किया। जिसके उपरांत सभी लोग माता अन्नपूर्णा की जय -जयकार करने लगे। इस कारण पृथ्वी वासी आज के दिन  माता अन्नपूर्णा की पूजा करते है। devotional Annpurna jayanti history 

माता अन्नपूर्णा देवी पूजा का महत्व । devotional Annpurna jayanti history 

अन्नपूर्णा देवी की पूजा के दिन रसोईघर साफ रखना चाहिए। इससे लोगो में यह सन्देश पहुँचता है की भोज्य पदार्थो को साफ रखना चाहिए। अन्न का सद्पयोग करना चाहिए। जितनी जरूरत हो उतना ही पकाये ताकि अन्न बर्बाद ना हो। माता अन्नपूर्णा जयंती के दिन अन्न के महत्व का ज्ञान होता है। devotional Annpurna jayanti history 

अन्नपूर्णा जयंती की पूजा विधि । devotional Annpurna jayanti history 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन माता पार्वती जी अन्नपूर्णा माता के रूप में अवतरित हुयी थी।  माता अन्नपूर्णा देवी अन्न की देवी है।अतः इस दिन घर में साफ-सफाई रखना चाहिए खासकर रसोईघर को जहाँ हमलोग अन्न को रखते है। तत्पचात गंगा जल छिड़क कर घर को शुद्ध करना चाहिए एवं घर के चूल्हे की पूजा करनी चाहिए। devotional Annpurna jayanti history 

अन्नपूर्णा जयंती के दिन माता पार्वती तथा भगवान शिव जी की पूजा-अर्चना करना चहिए। माता अन्नपूर्णा की पूजा करने से घर में कभी अन्न और जल की कमी नही होती है।इस तरह माँ अन्नपूर्णा की महिमा और कथा सम्पन्न हुयी। प्रेम से बोलिए माता पार्वती माँ अन्नपूर्णा जी की जय। devotional Annpurna jayanti history 

( प्रवीण कुमार )

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