25 जनवरी 2018 को है भीष्म अष्टमी,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional Bhishma Ashtami history



भीष्म अष्टमी व्रत माघ माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। तदानुसार, शनिवार 25 जनवरी 2018 को भीष्म अष्टमी व्रत मनाई जाएगी। महाभारत महाकव्य अनुसार इस दिन महाभारत के महापुरुष भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु प्राप्त हुई थी। भीष्म पितामह बाल ब्रह्मचारी और कौरव के पूर्वजो के नाम से भी जाना जाता है। devotional Bhishma Ashtami history 

भीष्म अष्टमी के दिन महापुरुष भीष्म के नाम से पूजन और तर्पण करने से वीर और सत्यवादी संतान की प्राप्ति होती है। भीष्म पितामह के पिता राजा शांतनु थे जबकि इनकी माता भगवती गंगा थी। पिता के चाह के कारण महापुरुष भीष्म पितामह आजीवन अविवाहित थे इसी कारण से इनका नाम भीष्म पड़ा। devotional Bhishma Ashtami history 

भीष्म अष्टमी व्रत कथा

महाभारत कथा के अनुसार गंगा पुत्र देवव्रत की माता देवी गंगा अपने पति को दिए हुए वचनानुसार अपने पुत्र को अपने साथ ले गयी थी। देवव्रत अर्थात भीष्म की प्रारम्भिक शिक्षा तथा लालन-पालन इनकी माता के पास पूरा हुआ। देवव्रत महर्षि परशुराम जी से शस्त्र विद्या प्राप्त किया। जब देवव्रत अर्थात पितामह भीष्म ने सभी शिक्षा प्राप्त कर लिया तब माता गंगा ने देवव्रत को उनके पिता को सौप दिया। devotional Bhishma Ashtami history 



कई वर्षो के पश्चात पिता-पुत्र का मिलन हुआ। राजा शांतनु ने पुत्र देवव्रत के शिक्षा का परीक्षा लिया जिसे देवव्रत ने अपने शौर्य कला से जीत लिया। तत्पश्चात, राजा शांतनु ने अपने पुत्र को युवराज घोषित कर दिया। एक बार राजा शांतनु शिकार के लिए घने जंगल में गए जहाँ राजा शांतनु पथ से भटक गए और इधर-उधर भटकने लगे। अँधेरा छाने लगा परन्तु राजा शांतनु लौट कर सम्राज्य नही अाये जिससे युवराज देवव्रत चिंतित हो उठे और पिता की खोज में जंगल की ओर निकल पड़े। devotional Bhishma Ashtami history 

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अँधेरे में राजा शांतनु भटकते-भटकते एक आश्रम के पास जा पहुंचे जहाँ उन्हें रात्रि पनाह मिला। रात्रि विश्राम के समय उनकी मुलाकात सत्यवती नामक युवती से जिनके रूप-सौंदर्य पर राजा शांतनु मोहित हो गए। राजा शांतनु ने युवती से विवाह के प्रस्ताव को पस्तुत किया परन्तु युवती ने इस सन्दर्भ में युवती के पिता से बात करने के लिए कहा। राजा शांतनु ने युवती के पिता को इस प्रसंग के बारे में बताया तब युवती के पिता ने एक शर्त पर विवाह के प्रस्ताव को मंजूर किया की विवाह के पश्चात उसके पुत्री का संतान ही सम्राज्य का राजा बनेगा। devotional Bhishma Ashtami history 

शर्त से सहमत है तो मैं अपनी पुत्री की शादी आपसे करवा दूंगा। राजा शांतनु को यह शर्त स्वीकार नही था। अगले दिन जब पुत्र देवव्रत को इस सम्बन्ध में जानकारी हुई तो उन्होंने पिता के सुख के सामने अपने सर्वस्व इच्छा को त्याग दिया तथा आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने का प्रतिज्ञा लिया। devotional Bhishma Ashtami history 

देवव्रत की प्रतिज्ञा से प्रसन्न होकर अपने पुत्र देवव्रत को इच्छा मृत्यु का वरदान दिया। कालांतर में भीष्म पितामह को पांच पांडवो के विरुद्ध युद्ध करना पड़ा तथा इस युद्ध में भीष्म पितामह घायल हो गए। भीष्म पितामह 18 दिनों तक मृत्यु शैया पर पड़े रहे तथा जब सूर्य उत्तरायण हुआ तब भीष्म पितामह ने अपना प्राण त्यागा। devotional Bhishma Ashtami history 

भीष्म अष्टमी व्रत की पूजा विधि तथा महत्व

भीष्माष्टमी को करने से प्रितदोष से मुक्ति मिलती है तथा पुत्र की प्राप्ति होती है। व्रती को इस दिन व्रत करने के साथ-साथ भीष्म पितामह की आत्मा की शांति के लिए भी तर्पण करना चाहिए। भीष्माष्टमी को व्रती को कुश, तिल, जल से भीष्म पितामह का तर्पण करना चाहिए। इससे व्रती को सभी पापो से मुक्ति मिलती है। भीष्म अष्टमी व्रत भीष्म पितामह की स्मृति में मनाया जाता है। इस तरह भीष्माष्टमी व्रत कथा सम्पन्न हुआ। प्रेम से बोलिए महापुरुष भीष्म पितामह की जय। devotional Bhishma Ashtami history 

( प्रवीण कुमार )

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