24 नवंबर 2017 को है चंपा षष्ठी व्रत ,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional chanpa shshthi history




भविष्य पुराण के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि तदनुसार 24 नवंबर 2017 को भगवान शिव जी के ज्येष्ठ पुत्र और देव गण के सेनानायक कार्तिकेय जी ने दैत्यराज तारकासुर का वध किया था। जिस कारण आज के दिन तीनो लोको में चंपा षष्ठी मनाया जाता है। चंपा षष्ठी के दिन भगवान शिव जी के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय की पूजा होती है। यह व्रत मंगलकारी और फलदायी होता है। devotional chanpa shshthi history

चंपा षष्ठी की कहानी  devotional chanpa shshthi history

भविष्य पुराण के अनुसार एक बार शिवभक्त दैत्यराज तारकासुर ने भगवान शिव जी की कठिन तपस्या कर शिव जी से वर माँगा।  हे प्रभु, मुझे ऐसा वर दो की मुझे आपके पुत्र के अलावा संसार में कोई न मार सके।  भगवान शिव जी तारकासुर की कठिन तपस्या के कारण विवश हो वर दे दिया। तारकासुर ने तीनो लोको को जीत लिया। स्वर्ग के स्वामी इंद्र ने विष्णु जी को इस तथ्य से अवगत कराया। devotional chanpa shshthi history

जितिया व्रत की कथा एवं इतिहास




तब भगवान विष्णु जी ने कहा, चिंतित ना हो इंद्रदेव निकट भविष्य में शिव जी के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय के हाथो तारकासुर का वध होगा। कुछ समय पश्चात भगवान शिव जी का विवाह माँ पार्वती से सम्पन्न हुयी और उनको प्रथम पुत्र की प्राप्ति हुयी जिसका नाम कार्तिकेय रखा गया।  मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी को भगवांन शिव जी के ज्येष्ठ पुत्र और देव गणो के सेनानायक कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया। अतः मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी को चंपा षष्ठी मनाया जाता है। devotional chanpa shshthi history

पूजा विधि और महत्व । devotional chanpa shshthi history

दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश राज्य के मल्लिकाजरुन स्थान पर भगवान कार्तिकेय जी निवास करते है। ऐसा माना गया है की विवाह के विवाद (पहले किसका विवाह हो कार्तिकेय या गणेश) को लेकर कार्तिकेय जी, भगवान शिव जी और गणेश जी से रुष्ठ होकर कैलाश से दक्षिण दिशा में मल्लिकाजरुन चले गए और इसी स्थान पर रहने लगे। अतः इस स्थान और चंपा षष्ठी व्रत का दक्षिण भारत में विशेष महत्व है। devotional chanpa shshthi history

चंपा षष्ठी के दिन भक्त जनो को दक्षिण दिशा की और मुह करके भगवान कार्तिकेय जी की पूजा व् आराधना करना चाहिए। व्रत की रात में भूमि पर सोना चाहिए। भगवान कार्तिकेय की अनुकम्पा से भक्त की सारी मनोकामना पूर्ण होती है। इस तरह कार्तिकेय कथा सम्पन्न हुयी। भक्त गण प्रेम से बोलिए भगवान कार्तिकेय की जय।  devotional chanpa shshthi history

( प्रवीण कुमार )

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