3 दिसम्बर को है देव दत्तात्रेय जयंती,जानिए कथा एवं इतिहास

devotional dev Dattatreya Jayanti




पुराणो के अनुसार भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पूर्ण रूप को दत्तात्रेय देव कहा जाता है। गुरु दत्तात्रेय के सम्बन्ध में ऐसा माना जाता है की दत्तात्रेय देव के तीन सर और छ भुजाएँ है। दत्तात्रेय जयंती के दिन उनके बालरूप की पूजा होती है। दत्तात्रेय जयंती मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। devotional dev Dattatreya Jayanti

दत्तात्रेय देव जयंती की कथा devotional dev Dattatreya Jayanti

धार्मिक पुराणो के अनुसार एक समय की बात है जब माँ पार्वती, लक्ष्मी और सावित्री को अपने पतिव्रत पर बड़ा गुमान होने लगा। जब यह बात नारद जी को पता चला तो उन्होंने तीनो देवियो का गुमान तोड़ने का सोचा। नारद जी सर्वप्रथम माँ पवत्री के पास गए और भगवान शिव जी तथा माँ पार्वती को नमस्कार कर बताया। मैं पृथ्वी लोक की भर्मण पर गया था, लौटते समय सोचा की आपका दर्शन करके ही ब्रह्म लोक को जाऊ। माता आते वक्त मैंने एक आश्चर्य देखा, कि माता अनसूया पृथ्वी लोक की सबसे बड़ी पतिव्रता नारी है। माता पार्वती यह सुन आग बबूला हो गयी। devotional dev Dattatreya Jayanti

नारद जी यह कह कैलाश स्थान से प्रस्थान कर गए। तब माँ पार्वती जी ने भगवान शिव जी से माता अनसूया की सतीत्व भंग करने की जिद करने लगी। माता पार्वती की जिद पर भगवान शिव मंद-मंद मुस्कराते हुए हां कर दिया। नारद जी वैकुण्ठ पहुंचे। वहा माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु को नमस्कार कर कहा, माते पृथ्वी पर एक घोर आश्चर्य देखा। माता अनसूया की पतिव्रता को देख मंत्र-मुग्ध हो गया। इस बात पर भगवान विष्णु जी मुस्करा कर नारद जी को देखा। यह कह नारद जी माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु से विदा लेकर वहां से प्रस्थान कर गए। devotional dev Dattatreya Jayanti

माता लक्ष्मी जी इस बात पर आग बबूला हो गयी और प्रभु विष्णु जी से माता अनसूया की सतीत्व भंग करने की जिद करने लगे। तब प्रभु विष्णु ने हां कह दिया। नारद जी अंत में ब्रह्मलोक पहुंचे। वहा पर नारद जी ने माता सरस्वती तथा प्रभु ब्रह्मा को नमस्कार कर कहा। मैं एक दुविधा में हूँ कृपा कर मेरी इस संका को दूर करे की तीनो लोक में सबसे अधिक पतिव्रता कौन है माता अनसूया या और कोई? devotional dev Dattatreya Jayanti

भगवान ब्रह्म जी ने कहा अभी तो निर्धारित करना कठिन है। हां, निकट भविष्य में आपको इसका उत्तर अवश्य मिल जायगा। नारद जी ने कहा आप त्रिदेव की महिमा आप ही जानो। नारद जी नमस्कार माते नमस्कार प्रभु कह, आकाश भ्रमण को ब्रह्म लोक से प्रस्थान कर गए। नारद जी के प्रस्थान के पश्चात माँ सावित्री ने प्रभु ब्रह्मा जी से जिद करने लगी। प्रभु आप माता अनसूया की पतिव्रता भंग करने का उपाय करे। ब्रह्मा जी ने हाँ कह दिया। devotional dev Dattatreya Jayanti

तीनो माँ की इच्छा को पूर्ण करने त्रिदेव अर्ताथ ब्रह्मा, विष्णु और महेश भिक्षुक का रूप धारण कर माता अनसूया की कुटिया पर पहुंचे। माता को पुकार लगाया, माते भिक्षा दो। भिक्षुकों की पुकार सुन, माता अनसूया कुटिया से बाहर आई तथा बारी-बारी से ब्रह्मा, विष्णु और महेश को चरण स्पर्श कर प्रणाम किया। devotional dev Dattatreya Jayanti

तीनो देव एक साथ कह उठे, माते खाने को कुछ है बड़ी जोर की भूख लगी है। तब माता अनसूया बोल पड़ी, आपलोग थोड़ी देर विश्राम कीजिये। मैं जल्द आपके लिए कुछ पकाती हूँ।  तीनो देव विश्राम करने लगे। कुछ समय पश्चात माता अनसूया भोजन लेकर तीनो देवो को भोजन कराने आई। उस वक्त तीनो देव जिद करने लगे की अपनी गोद में बिठा भोजन कराये तभी हमलोग भोजन को स्वीकार करेंगे। devotional dev Dattatreya Jayanti 

माता अनसूया क्रोधित हो गयी पर अगले ही पल प्रभु की माया को समझ गयी। माता अनसूया ने जल में मंत्र का उच्चारण करते हुए जल तीनो देव पर तथास्तु कह छिड़क दिया। जिस कारण तीनो देव बाल्य रूप में आ गए। तब माता अनसूया ने उन्हें उपने गोद में लेकर भोजन ग्रहण कराया। devotional dev Dattatreya Jayanti




माँ पार्वती, लक्ष्मी  और माँ सरस्वती की चिंता devotional dev Dattatreya Jayanti

माता अनसूया तीनो देव के  बाल्य रूप  का लालन-पालन करने लगी। समय के साथ देवी माँ पार्वती , लक्ष्मी और माँ सावित्री की चिंता बढ़ने लगी की अब तक प्रभु क्यों नही लौटे है। तब देवी माँ ने नारद जी से विनती किया।  महर्षि नारद जी आप ही पता लगाकर आये की तीनो देव कहा है। नारद जी ने कहा, माते तीनो देव माता अनसूया के बच्चे बन उनके पलने में खेल रहे है।

यह जानते ही तीनो देवी उलटे पाँव अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे और माता अनसूया से अपने पति के विषय में पूछने लगी।  माता अनसूया ने कहा आपके पति पलने में खेल रहे है।  अपने पति की पहचान कर साथ लेकर जा सकती है। देवी माँ लक्ष्मी ने बाल्यरूप में तीनो देवो में भगवन विष्णु अर्थात अपने पति भगवान विष्णु को पहचान कर उठाया, लेकिन वह भगवान शिव जी निकले। devotional dev Dattatreya Jayanti

देव दत्तात्रेय का जन्म devotional dev Dattatreya Jayanti

तीनो देवियो को अपनी गलती का अहसास होने लगा। तब तीनो देवी ने एक साथ माता अनसूया से क्षमा-याचना की तथा तीनो देवी ने माता अनसूया से पतिव्रत धर्म के समक्ष अपना मस्तक झुका कर विनती करने लगी। हे माँ, मेरे किये हुए अपराधो को माफ़ करे तथा तीनो देवो को पूर्वरूप में कर दे। माता अनसूया ने तीनो देवी की क्षमा-याचना से प्रसन्न हो तीनो देवो को देव के रूप में प्रकट कर दिए। devotional dev Dattatreya Jayanti

मासिक दुर्गाष्टमी की कथा एवं इतिहास

जिससे माँ पार्वती, लक्ष्मी और माँ सरस्वती प्रसन्न हो, माता अनसूया से वर मागने को कहा। माता अनसूया ने बोली आप तीनो देव मुझे पुत्र रूप में प्राप्त हो। तत्पश्चात, माँ तथा देवो ने तथास्तु कह अपने-अपने लोक को चले गए। कालांतर में तीनो देव माता अनसूया के गर्भ से प्रकट हुए।  भगवान शिव जी के अंश से दुर्वाशा, भगवान विष्णु जी के अंश से दत्तात्रेय तथा भगवान ब्रह्मा जी के अंश से चन्द्रमा का जन्म हुआ। दत्तात्रेय जी विष्णु जी का अवतार है। भगवान विष्णु जी के इस रूप को दत्तात्रेय जयंती के रूप में मनाया जाता है। devotional dev Dattatreya Jayanti

देव दत्तात्रेय जी की पूजा और महत्व devotional dev Dattatreya Jayanti

भगवान विष्णु जी के इस रूप अर्थात देव दत्तात्रेय जी की पूजा नियम-पूर्वक तथा सविधि करने से भक्त जनो की मनोकामना पूर्ण होती है। पूजा धुप, दीप नेवदय आदि का भोग लगाकर करे। देव दत्तात्रेय के भक्तो पर भगवान विष्णु जी की कृपा सदा बनी रहती है।  तो इस तरह देव दत्तात्रेय जी की कथा सम्पन्न हुई। भक्त गण प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु जी के अवतार देव दत्तात्रेय जी की जय हो। devotional dev Dattatreya Jayanti

( प्रवीण कुमार )

loading…


You may also like...

Leave a Reply