26 दिसंबर को होगी मंडल पूजा, जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional madala puja vrat vidhi



मंडल पूजा का दक्षिण भारत में विशेष महत्व है। मंडल पूजा के दिन भगवान अय्यप्पा की पूजा की जाती है। भगवन अय्यप्पा को हरिहर के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ है भगवान शिव जी एवम विष्णु जी का अंश। ऐसी मान्यता है की सबरीमाला मंदिर का दरवाजा केवल मंडल पूजा के दौरान ही खुला रहता है। मंडल पूजा  26 दिसंबर को होगी। devotional madala puja vrat vidhi 

भगवान अय्यप्पा, हरिहर की कथा।

धार्मिक ग्रंथो के अनुसार भगवान श्री हरी विष्णु जी का नारीत्व रूप मोहिनी है जिनके गर्भ से भगवान हरिहर का जन्म हुआ है। भगवान हरिहर विष्णु जी और शिव जी का अंश है। कथा के अनुसार भगवान हरिहर के समय के तत्कालीन राजा ने उन्हें गोद लिया था लेकिन भगवान हरिहर को महलो से कोई सरोकार नही था। अतः भगवान हरिहर ने महल का त्याग कर दिया। इसलिए मंडल पूजा के दौरान भगवान हरिहर की रथ यात्रा आज भी निकली जाती है और मकर सक्रांति के दिन सबरीमाला लाई जाती है। devotional madala puja vrat vidhi 




मंडल पूजा की विधि।

मंडल पूजा में भगवान अय्यप्पा की पूजा की जाती है।  यह पुरे 41 दिन तक मनाई जाती है। मंडल पूजा में सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश की पूजा कर उनका आह्वान किया जाता है।  दक्षिण भारत में मंडल पूजा दक्षिणी संस्कृति के अंतर्गत मनाया जाता है।  पूजा के दौरान भक्त तुलसी माला अथवा रूद्र माला धारण करते है। devotional madala puja vrat vidhi 

मासिक दुर्गाष्टमी की कथा एवं इतिहास

मंडल पूजा के समयावधि में प्रतिदिन सबुह में जगकर स्नान ध्यान से निवृत हो भगवान अय्यप्पा की पूजा की जाती है। भक्त गण अपने मस्तक पर भभूति लगते है। माडल पूजा शाम में भी किया जाता है। नियमित व् विधिवत पूर्वक उपासना करने से भगवान हरिहर प्रसन्न होते है और मनोवांछित फल देते है। इस तरह मंडल पूजा की कथा सम्पन्न हुयी।  प्रेम से बोलिए भगवान अय्यप्पा रूप हरिहर की जय। devotional madala puja vrat vidhi 

( प्रवीण कुमार )

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