9 मार्च 2017 को है नरसिंह द्वादशी,जानिए कथा एवं इतिहास

devotional narshingha dwadashi vrat katha




धार्मिक मान्यताओ के अनुसार फाल्गुन में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को नरसिंह द्वादशी मनाया जाता है। तदनुसार, गुरुवार 9 मार्च 2017 को नरसिंह द्वादशी मनाई जाएगी। भगवान विष्णु जी के बारह अवतार में एक अवतार नरसिंह भगवान का है। इस व्रत को करने से व्रती को प्रत्येक बाधा से मुक्ति मिलती है। devotional narshingha dwadashi vrat katha 

भक्त प्रह्लाद जो हिरण्यकश्यप नामक आततायी राजा का पुत्र था। अपने पुत्र की हत्या के लिए कई प्रकार से जतन किया। परन्तु भगवान विष्णु जी ने अपने भक्त प्रह्लाद को हर संकट से मुक्त किया। अतः कहा गया है की भक्ति में आये संकट से घबराना नही चाहिए। भगवान की महिमा अपरम्पार है तथा भगवान अपने भक्तो को संकट से जरूर मुक्त करते है। devotional narshingha dwadashi vrat katha 

नरसिंह कथा

भगवान विष्णु के बारह अवतार में से एक अवतार भगवान नरसिंह का है। नरसिंह अवतार में भगवन श्री हरि विष्णु जी आधा मनुष्य तथा आधा शेर का रूप धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि रहते थे। ऋषि कश्यप के पत्नी का नाम दिति था तथा उनकी दो संतान थी। devotional narshingha dwadashi vrat katha 

ऋषि कश्यप ने प्रथम पुत्र का नाम ‘हरिण्याक्ष’ तथा दूसरे पुत्र का नाम ‘हिरण्यकशिपु’ रखा था। परंतु ऋषि के दोनों संतान असुर प्रवृति का होगा। आसुरी प्रवृति के होने के कारण भगवान विष्णु जी के वराह रूप ने पृथ्वी की रक्षा हेतु ऋषि कश्यप के पुत्र ‘हरिण्याक्ष का वष कर दिया था। अपने भाई की मृत्यु से दुखी तथा क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने अपने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प लिया। devotional narshingha dwadashi vrat katha 

हिरण्यकशिपु ने भगवान ब्रह्मा जी का कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा जी हिरण्यकशिपु को अजेय होने का वरदान दिया। वरदान पाने के पश्चात हिरण्यकशिपु ने स्वर्ग पर अधिपत्य स्थापित कर लिया तथा स्वर्ग के देवो को मारकर भगा दिया। तीनो लोको में त्राहि माम् मच गया। अजेय वर प्राप्त करने के कारण हिरण्यकशिपु तीनो लोको का स्वामी बन गया। देवता गण उनसे युद्ध में पराजित हो जाते थे। devotional narshingha dwadashi vrat katha 




हिरण्यकशिपु को अपने शक्ति पर अत्यधिक अहंकार हो गया। जिस कारण हिरण्यकशिपु प्रजा पर भी अत्याचार करने लगा। इस दौरान हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया। जिसका नाम प्रह्लाद रखा गया। परन्तु प्रह्लाद पिता के स्वभाव से पूर्णतः विपरीत स्वभाव का था। भक्त प्रह्लाद बचपन से ही संत प्रवृति का था तथा भक्त प्रह्लाद अपने बाल्यकाल से ही भगवान विष्णु जी का भक्त बन गया। devotional narshingha dwadashi vrat katha 

भक्त प्रह्लाद अपने पिता के कार्यो का विरोध करता था। भगवान-भक्ति से प्रह्लाद का मन हटाने के लिए हिरण्यकशिपु ने बहुत प्रयाश किया। परन्तु भक्त प्रह्लाद इससे कभी विचलित नही हुए। अंततः हिरण्यकशिपु ने अनीति का सहारा लिया तथा अपने पुत्र की हत्या के लिए उसे पर्वत से धकेला गया, होलिका दहन में जलाया गया। परन्तु हर बार भगवन विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच जाता था।

भगवान के इस चमत्कार ने प्रजा जन भी भगवान विष्णु की पूजा तथा गुणगान करने लगे। इस घटना से हिरण्यकशिपु क्रोधित हो गया। भक्त प्रह्लाद को कटु शब्द में बोला, कहाँ है तेरा भगवान। सामने बुला। प्रह्लाद ने कहा, प्रभु तो सर्वशक्तिमान है। वो तो कण-कण में व्याप्त है। यहाँ भी है, वहाँ भी है। devotional narshingha dwadashi vrat katha 

आमलकी एकादशी की कथा एवं इतिहास

क्रोधित हिरण्यकशिपु ने क्रोधित होकर इस खम्बे में तेरा भगवान छिपा है ? भक्त प्रह्लाद ने कहा, हाँ। यह सुनकर हिरण्यकशिपु ने खम्बे पर अपने गदे से प्रहार किया। तभी खम्बे को चीरकर भगवान नरसिंह ने हिरण्यकशिपु को अपने जांघो पर उसकी छाती को नखो से फाड़ कर उसका वध कर डाला। भगवान नरसिंह ने भक्त प्रहलाद को वरदान दिया। जो कोई आज के दिन भगवान नरसिंह का स्मरण, व्रत तथा पूजा-अर्चना करेगा। उसकी मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होगी। devotional narshingha dwadashi vrat katha 

नरसिंह द्वादशी पूजन विधि

नरसिंह द्वादशी के दिन व्रत-उपवास एवम पूजा-अर्चना की जाती है। नरसिंह द्वादशी के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहर्त में उठकर स्नान आदिसे निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए एवम भगवान नरसिंह की पूजा विधि-विधान से करे।

भगवान नरसिंह पूजा फल, फूल, धुप, दीप, अगरबत्ती, पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल, अक्षत एवम पीतांबर से करे।
भगवान नरसिंह को प्रसन्न करने हेतु निम्न मन्त्र का जाप करे
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥

इन मंत्रो के जाप करने से समस्त प्रकार के दुखो का निवारण होता है तथा भगवान नरसिंह की कृपा से जीवन में मंगल ही मंगल होता है। भगवान नरसिंह अपने भक्तो की सदैव रक्षा करते है। इस तरह नरसिंह द्वादशी की कथा सम्पन्न हुआ। प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु रूप नरसिंह देव की जय।  devotional narshingha dwadashi vrat katha 
( प्रवीण कुमार )

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