14 नवंबर 2017 को मनाई जाएगी उत्पन्ना एकादशी,जानिए कथा एवं इतिहास

know devotional utpanna ekadashi history




वेदो, पुराणो, एवं शास्त्रो के अनुसार एकादशी व्रत पुण्यकारी और फलदायी होता है। हिंदी पंचांग के अनुसार वर्ष में 24 एकादशी होता है। मलमास या अधिमास  वर्ष  में 26 एकादशी होता है।  मार्गशीर्ष माह की उत्पन्ना एकादशी  गुरुवार 14 नवंबर 2017 को मनाई जाएगी। know devotional utpanna ekadashi history

उत्पन्ना एकादशी की कहानी know devotional utpanna ekadashi history

पद्म पुराण के अनुसार एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से पुण्यकारी एकादशी  की उत्पत्ति के विषय में पूछा, तब भगवान श्री कृष्ण ने कहा।  सतयुग में मुर नामक एक राक्षस रहा करता था जिसने अपनी शक्ति के दम पर स्वर्ग के स्वामी इंद्र व् समस्त देवताओ को पराजित कर स्वर्ग पर अपना अधिपत्य जमा लिया। know devotional utpanna ekadashi history

सब देवता महादेव के पास पहुंच कर महदेव से अपनी व्यथा सुनायी।  देवताओ  की  विनती  सुन  महादेव समस्त देव जनो के साथ भगवान  विष्णु  के  पास  क्षीरसागर गए। वहां भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर शयन मुद्रा में थे।  इंद्र तथा देवताओ ने स्तुति कर उनको जगाया।  देवताओ  के अनुरोध पर  भगवान विष्णु ने राक्षसो से युद्ध कर  सैंकड़ो राक्षस का संहार कर दिया तत्पश्चात भगवान विष्णु बद्रिकाश्रम चले गए। know devotional utpanna ekadashi history




वहां भगवान विष्णु  बारह योजन लम्बी सिंहावती गुफामें  शयन करने लगे। भगवान विष्णु को मारने के लिए क्रोधित मुर  राक्षस जैसे ही गुफा में प्रवेश किया। एक कन्या जोकि श्री भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुई थी ने युद्ध कर    मुर नामक राक्षस का वध कर दिया। भगवान के जागने के पश्चात कन्या ने बताया की उसने मुर राक्षस का वध कर दिया है। भगवान विष्णु, कन्या के कार्य से  प्रसन्न होकर उस कन्या  को उत्पन्ना एकादशी को वर देकरअपनी प्रिय तिथि घोषित कर दिया। कन्या  एकादशी  वर पाकर बहुत प्रसन्न हुयी। know devotional utpanna ekadashi history

उत्पन्ना एकादशी का महत्व.   know devotional utpanna ekadashi history

कहा जाता है की जो मनुष्य एकादशी व्रत करता है उसे भगवान विष्णु की कृपा से वैकुण्ठ धाम प्राप्त होता है। एकादशी पापनाशक व्रत है। एकादशी व्रत के सुनने मात्र से हजारो गौदान का पुण्यफलप्राप्त होता है।

संकष्टी चतुर्थी की कथा एवं इतिहास

एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करे। धार्मिक पंडितो का मानना है की जो भक्त एकादशी की रात उपवास कर जागरण करता है उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है। जो भक्त एकादशी व्रत करते है उसे एकादशी के दिन अन्न ग्रहण नही करना चाहिए। व्रतधारी उस दिन फलाहार कर सकते है।  मार्गशीर्ष के  उत्पन्ना एकादशी से इस  व्रत को  प्रारम्भ करना चाहिए।

उत्पन्ना एकादशी को करने से दिव्य फल की प्राप्ति होती है।  उपयुक्त विधि विधानों के अंतर्गत व्रत करने से एकादशी व्रत सफल होता है। इस तरह एकादशी व्रत सम्पन्न की जाती है। प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु जी की जय।

( प्रवीण कुमार )

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