31 जनवरी 2018 को है रैदास जयंती,जानिए संत रविदास जी की जीवनी

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गुरु रैदास के संबंध में उचित प्रमाण नही है। कुछ विद्वान रैदास के जन्म का समय 1398 ई में मानते है जबकि कुछ विद्वान रैदास के जन्म समय को 1482-1527 मानते है। इस वर्ष बुधवार 31 जनवरी 2018 को रैदास जयंती मनाई जाएगी। रविदास जी का जन्म भक्ति काल में काशी के एक चमार परिवार में हुआ था तथा उनके पिता का नाम ” रग्घू ” और माता का नाम घुरविनिया था। know ravidad life story 

रैदास जी ने अपने पैतृक व्यवसाय को निःसंकोच स्वीकारा किया। रैदास जी बालय्काल से हर एक कार्य को बहुत लगन और मेहनत से किया करते थे। उनकी मधुर व्यवहार तथा कर्तव्य निष्ठ प्रवृति को देख लोग अति प्रसन्न हो जाते थे। know ravidad life story 




संत एवं भक्त कवि रविदास

हिंदी साहित्य के इतिहास में मध्यकालीन युग भक्तिकाल के नाम से विख्यात है। यह काल भक्ति काल के लिए पुनर्जागरण रहा। इस काल में अनेक संत और कवि हुए जिन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त कुरूतियों को समाप्त करने का अथक प्रयास किया। रैदास जी इन संत और कवि में से एक थे। know ravidad life story 

उन्होंने जाति, धर्म तथा समाज से उठकर काम करने का प्रयत्न्न किया। रविदास जी संत, कवि तथा प्रभु के भक्त थे। उनके पदो में भक्ति की भावना, आत्म-निवेदन तथा ध्यान साधना की भावना प्रमुख रूप में पायी जाती है। रैदास जी ने समाज में भगवान को पाने के लिए भक्ति मार्ग को सरल तरीका बताया और स्वयं भी भक्ति के रास्ते का अनुसरण किया। know ravidad life story 

रैदास जी ने सत्संग के जरिये लोगो के बीच अपने विचारो तथा प्रभु के ज्ञान को पहुचाया। रैदास जी ने अपनी रचना के जरिये उच्च वर्गो के लोगो को भी प्रभु कृपा से लाभान्वित करवाया। उनकी पंक्ति जो आज भी प्रचलित है। know ravidad life story 

प्रभुजी तुम चंदन हम पानी।
जाकी अंग अंग वास समानी।।

उपर्युक्त दोहा के पंक्ति में रैदास जी ने कल्पनशीलता, चिंतन तथा आध्यात्मिक शक्ति को सरल एवम सहज भाषा में व्यक्त किया है। रैदास जी के ने अपनी कविता की भाषा सरल तथा सहज रखा जिससे आम जन को इसे समझने में आसानी हुई। रैदास जी के जीवन में अनेक ऐसी घटनाये हुई जिसे उन्होंने कविता के माध्यम से लोगो के समक्ष प्रस्तुत किया। know ravidad life story 

एक बार की बात है गंगा-स्नान के लिए रैदास जी के उनके एक शिष्य ने उनसे गंगा-स्नान के लिए आग्रह किया तब रैदास जी ने कहा ” शिष्य मैंने पूर्व में ही एक सज्जन पुरुष के जूते बनाने का वचन दे दिया है तथा अगर अब उन्हें समय पर जूता बना के नही देता हूँ तो वचन भंग होगा। अतःएक तरफ गंगा-स्नान तथा दूसरी तरफ वचन तोड़ने का अपजश तो कर्तव्य यही कहता है की मैं अपने दिए गए वचनो का पालन करू। know ravidad life story 

रैदास जयंती महत्व

माघ पूर्णिमा के दिन रैदास जयंती मनाई जाती है। अतः यह दिन धर्म तथा भक्ति के लिए अति शुभ माना जाता है। रैदास जी राम तथा कृष्ण भक्त परम्परा के कवि तथा संत माने जाते है। संत रैदास जी खुद काव्यकार थे परन्तु आज के समय में तथा समाज में भी उनके काव्य का संगीत के साथ तालमेल कर कई भजन बनाये गए है जो समाज में बहुत प्रचलित है। know ravidad life story 

माघ पूर्णिमा की कथा एवं इतिहास

संत रैदास जी जयंती देश भर में अति उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन जगह-जगह शोभा-यात्रा तथा झांकिया निकाली जाती है। संस्कृतिक कार्क्रम प्रस्तुत किया जाता है तथा आदिकाल के संत तथा महात्मा लोग उनके आदर्शो को अपना लक्ष्य बनाते है तथा समाज में उनके उपदेशो को प्रचार-प्रसार करते है। समस्त देश वाशी संत रैदास जी को उनके पुण्य तिथि पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते है। भक्तिकाल के महान संत तथा हिंदी काव्य गुरु को शत-शत नमन।  know ravidad life story
( प्रवीण कुमार )

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