List Of Festivals In November

हिन्दू धर्म में एकादशी के व्रत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। एकादशी व्रत के करने से व्रती को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत व्रती को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। वर्ष में 24 एकादशी व्रत मनाई जाती है। 

वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। तदनुसार, कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 5 नवंबर 2018 को है प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। 

5 नवंबर 2018 को मासिक शिवरात्रि है। हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है। जहाँ वर्ष में एक महाशिवरात्रि मनाया जाता है वही वर्ष के प्रत्येक महीने में एक मासिक शिवरात्रि मनाया जाता है। 

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व श्रद्धा व् विश्वास के साथ मनाया जाता है। तदनुसार इस वर्ष 5 नवंबर 2018 को धनतेरस मनाया जाएगा। 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी या वैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष  6 नवंबर 2018 को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी।

हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या की अर्धरात्रि में माँ काली पूजा की जाती है। तदनुसार इस वर्ष दिवाली से एक दिन पूर्व 6 नवंबर 2018 को काली पूजा की जाएगी। 

हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष 8 नवंबर 2018 को गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी। गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन की जाती है। 

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भैया दूज मनाया जायेगा। जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। हिन्दू समाज में इस पर्व का अति विशेष महत्व है।

धार्मिक धारणा है की हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा से प्रत्येक शुभ कार्य आरम्भ किया जाता है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को लाभ पंचमी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष 12 नवंबर 2018 के दिन लाभ पंचमी मनाई जाएगी। 

छठ महापर्व परमात्मा के प्रत्यक्ष पूजा का सर्व श्रेष्ठ उदाहरण है। छठ पूर्णतया प्रकृति रूपी परमेश्वर के द्धारा मानव को दिए गए विशेष वरदानों को पाने का पावन पर्व है। इस पवित्र ब्रत के नियम बड़े ही कठिन हैं।

पंडित जवाहर लाल नेहरू जी का जन्म इलाहबाद में एक धनी वकील मोतीलाल नेहरू के घर पर 14 नवम्बर 1889 ई में हुआ था। इनकी माता का नाम स्वरूप रानी था। नेहरू जी की तीन बहनें थी। 

हिन्दू धर्म में दुर्गापूजा और दुर्गाष्टमी का बड़ा महत्व है। दुर्गापूजा आश्विन माह में मनाया जाता है जबकि मासिक दुर्गाष्टमी प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी को होती है। इसे मासिक दुर्गाष्टमी या मास दुर्गाष्टमी कहते है।

अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी व्रत मनाई जाती है तदनुसार इस वर्ष 6 नवंबर 2018 को गोपाष्टमी व्रत मनाई जाएगी। इस दिन गौ माता की पूजा करने से अमोघ फल प्राप्त होता है। 

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी से लेकर नवमी तक जगद्धात्री पूजा मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष 17 नवंबर 2018 को मनाई जाएगी। माँ जगद्धात्री राजस एवम तामस का प्रतीक मानी जाती है।

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष 17 नवंबर 2018 को अक्षय नवमी मनाई जाएगी। यह व्रत विशेषकर महिलाएं पुत्र प्राप्ति एवम पारिवारिक सुख, शांति के लिए करती है।

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। तदनुसार, मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 20 नवंबर 2018 को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा।

सनातन धर्म में पूर्णिमा  को शुभ , मंगल और फलदायी माना गया है। हिन्दू पंचांग केअनुसार वर्ष में 16 पूर्णिमा होती है और इस 16 पूर्णिमा में  वैसाख, माघ और कार्तिक पूर्णिमा को स्नान-दान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

गुरु नानक जी (पंजाबी: ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ) (15 अप्रैल 1469 – 22 सितंबर 1539)  सिख धर्म के प्रथम गुरु (आदि गुरु ) तथा सिख धर्म के संस्थापक  है। गुरु नानक जी जिन्हे लोग गुरु जी, बाबा नानक , गुरु नानक जी 

धार्मिक धारणा है की हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा से प्रत्येक शुभ कार्य आरम्भ किया जाता है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। सनातन धर्म में 24 दिन ऐसे होते है जो पूर्णतः भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है।

शिवरूप भैरव जयंती या काल भैरव जयंती 29 नवंबर 2018 को मनाया जायेगा।  वेद, पुराण ,शास्त्र एवं ऋषि मुनि का कहना या मानना है की भगवान शिव जी ने मार्गशीर्ष कृष्ष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान भैरव जी का रूप धारण किया था