List Of Festivals In September

हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी को बलराम जयंती मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष रविवार 1 सितम्बर 2018 को बलराम जयंती मनाई जाएगी। इस व्रत को करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। 

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्ठमी को कालाष्टमी मनाई जाती है। तदनुसार,बुधवार 2 सितंबर 2018 को कालाष्टमी है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी या भैरवाष्टमी के रूप मनाया जाता है। 

तमिल पंचांग के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह में मासिक कार्तिगाई मनाया जाता है। तदनुसार, सितंबर माह में सोमवार 2 सितंबर 2018 को मासिक कार्तिगाई मनाया जाएगा। कार्तिगाई दीपम पर्व को दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में हिन्दू धर्म के लोग मनाते है ।

पौराणिक धर्म ग्रंथो के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म भाद्रपद की कृष्ण पक्ष में अष्टमी की अर्धरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी तथा वासुदेव जी के पुत्ररूप में हुआ था। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष भगवान श्री कृष्ण जी की जन्म जयंती मनाई जाती है।

हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत प्रत्येक माह के दोनों पक्षों में मनाई जाती है। भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। 

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। तदनुसार, भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी रविवार 7 सितंबर 2018 को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। l

रविवार 8 सितम्बर 2018  को मासिक शिवरात्रि है। हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है। जहाँ वर्ष में एक महाशिवरात्रि मनाया जाता है वही वर्ष के प्रत्येक महीने में एक मासिक शिवरात्रि मनाया जाता है।

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों में अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। जिस दिन सूर्य और चन्द्र साथ रहते है उस दिन को अमावस्या मनाई जाती है। वर्ष के प्रत्येक माह में अमावस्या मनाई जाती है। तदनुसार भाद्रपद की अमावस्या सोमवार 9 सितम्बर 2018 को मनाया जाएगी । 

12 सितम्बर 2018 को है वराह जयंती जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

जगत के कल्याण हेतु भगवान विष्णु जी इस रूप में अवतरित होकर पापियों का अंत करके धर्म और भक्त की रक्षा किये थे। अतः भक्त गण इस दिन श्रद्धा-भाव से भगवान विष्णु जी के अवतरित रूप वाराह जी के निमित्त व्रत व् उपवास रखते है। 

धार्मिक धारणा है की हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा से प्रत्येक शुभ कार्य आरम्भ किया जाता है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। सनातन धर्म में 24 दिन ऐसे होते है जो पूर्णतः भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। 

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष मंगलवार 14 सितम्बर 2018 को ऋषि पंचमी मनाई जाएगी। यह व्रत विशेषकर महिलाएं करती है। 

हिन्दू धर्म में प्रत्येक वर्ष 17 सितम्बर को विशवकर्मा पूजा मनाई जाती है  इस वर्ष 17 सितम्बर 2018 को विश्वकर्मा पूजा है। ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में जितनी भी राजधानियां थी

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष मंगलवार 17 सितम्बर 2018 को राधाष्टमी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। 

हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी कहा जाता है। तदानुसार, इस वर्ष शनिवार 20 सितंबर 2018 को पार्श्व एकादशी मनाई जाएगी। इस व्रत को करने से व्रती को सुख, सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

हिन्दू धर्म के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भुवनेश्वरी जयंती मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष रविवार 21 सितंबर 2018 को भुवनेश्वरी जयंती मनाई जाएगी। माँ भुवनेश्वरी भगवान शिव लीला की सहभागी है। 

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। 

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष मंगलवार 23 सितंबर 2018 को अनंत चतुर्दशी का मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यता अनुसार आश्विन माह की कृष्ण पक्ष के प्रथम तिथि से श्राद्ध पक्ष प्रारम्भ होती है। 

धार्मिक धारणा है की हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश की पूजा से प्रत्येक शुभ कार्य आरम्भ किया जाता है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। सनातन धर्म में 24 दिन ऐसे होते है जो पूर्णतः भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है।

मध्वाचार्य जी का जन्म 1238 ई में हुआ था। ये तत्काल भारत में भक्ति आंदोलन के महत्वपूर्ण दार्शनिकों में से एक थे। मध्वाचार्य जी आनन्दतीर्थ और पूर्णप्रज्ञ के नाम से प्रसिद्ध है। जबकि मध्वाचार्य जी तत्ववाद के प्रवर्तक थे।