13 मार्च 2018 को हैं प्रदोष व्रत, जानिए कथा एवं इतिहास

pradosh vrat ki katha

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वर्ष 2018 चैत्र माह का प्रथम प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी अर्थात बुधवार 13 मार्च 2018 को है।कलयुग में प्रदोष व्रत का अतुल्य महत्व है, भगवान शिव जी के भक्त श्री सूत जी का कहना है की जो भक्त प्रदोष व्रत के दिन उपवास रख कर शिव जी की आराधना व् पूजा करते है, उनकी सारी मनोकामना पूर्ण होती है तथा सभी प्रकार का दोष दूर हो जाता है ऐवम परिवार में मंगल ही मंगल होता है। pradosh vrat ki katha 

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प्रदोष व्रत  प्रत्येक महीने के दोनों पक्ष की त्रयोदशी को पड़ता है । भक्तगण सप्ताह के सातो दिन व्रत रख सकते है। ऐसी मान्यता है की प्रदोष  व्रत को  करने  से  सप्ताह के सातो दिन  भिन्न -भिन्न प्रकार की मनोकामनाएँ पूर्ण होती है। रविवार को प्रदोष व्रत करने से शरीर निरोग रहता है, सोमवार को प्रदोष व्रत करने से इच्छित फल मिलता है , मंगलवार को प्रदोष व्रत करने से रोग से मुक्ति मिलती है , बुधवार को प्रदोष व्रत करने से सभी प्रकार की मनोकामना सिद्ध होती है, गुरुवार को प्रदोष व्रत करने से शत्रु का नाश होता है , शुक्रवार को प्रदोष व्रत करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है , तथा  शनिवार को प्रदोष व्रत  करने से पुत्र की प्राप्ति होती है। pradosh vrat ki katha 

प्रदोष व्रत की महिमा

धार्मिक ग्रंथो एवं पुराणों के अनुसार गंगा नदी के तट पर भगवान शिव जी के भक्त श्री सूत जी ने प्रदोष व्रत की महिमा सनकादि ऋषियों को सुनाया था। भगवान शिव जी के भक्त  श्री सूत जी ने कहा  कलयुग में अधर्म की प्रधानता रहने वाली है और मनुष्य धर्म की राह छोड़ अधर्म की राह पर चलेगा। कलयुग में चारो तरफ अशांति ,अन्याय और आतंक होगा।  मनुष्य अत्याचारी और अनाचारी बन  अपने कर्तव्य से विमुख हो नीच कर्म में प्रयत्ननशील हो जायेगा जिसके कारण धर्म का पतन होने लगेगा। pradosh vrat ki katha 

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कलयुग में जो भक्त प्रदोष व्रत के दिन श्रद्धा और निष्ठा से भगवान शिव जी की पूजा व् आराधना करेगा उस पर भगवान शिव जी का स्नेह उमड़ेगा, भक्त की मनोकामना यथाशीघ्र पूरी होगी तथा भगवान शिव जी की कृपा से भक्त को मृत्यु उपरांत स्वर्गलोक की प्राप्ति होगी। भगवान शिव जी के भक्त श्री सूत जी ने सनकादि ऋषियों से कहा हे, ऋषि गण यह कथा पुर्व में पहली बार भगवान शिव जी के द्वारा माँ सती को सुनाया गया था आज यह पावन व्रत की महिमा और कथा मैंने आपको सुनाया है। pradosh vrat ki katha 

प्रदोष व्रत करने की विधि pradosh vrat ki katha  

भगवान भक्त सूत जी ने कहा है महीने की दोनों पक्ष  अर्थात कृष्ण पक्ष तथा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन को प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन सूर्य अस्त के उपरांत तथा निशा  पूर्व का समय प्रदोष काल कहलाता है। प्रदोष व्रत में गौरी पति महेश की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत के दिन जो भक्त भगवान शिव जी की उपासना एवं व्रत करते है उन्हें इस दिन निर्जल रहकर व्रत रखना होता है।

प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव जी की प्रातःकाल और संध्या में  बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप से पूजा व् अर्चना  करना चाहिए । प्रदोष व्रत के करने से महादेव प्रसन्न होते है और उनकी कृपा से भक्त के सारे दुःख व् कलेश दूर हो जाता है तथा भक्त मृत्यु उपरांत स्वर्गलोक प्राप्त करता है।  इस तरह प्रदोष व्रत की कथा संपन्न हुयी प्रेम से बोलिए भोले शंकर की जय , माता  पार्वती की जय . pradosh vrat ki katha 

( प्रवीण कुमार )



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