5 अक्टूबर 2017 को है शरद पूर्णिमा जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

devotional sharad purnima history


हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते है। इस पूर्णिमा को कोजगरा पूर्णिमा अथवा रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि में चन्द्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। इस दिन कोजगरा व्रत भी मनाया जाता है। devotional sharad purnima history

तदनानुसार इस वर्ष गुरुवार 5 अक्टूबर 2017 को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि में चन्द्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। पूर्णिमा के दिन विधि-पूर्वक पूजन और दान-पुण्य करने से अमोघ फल प्राप्त होता है। devotional sharad purnima history

कथा

पौराणिक कथा अनुसार एक साहूकार को दो पुत्रियां थी। दोनों पुत्री पूर्णिमा का व्रत रखती थी। बड़ी पुत्री श्रद्धा-भाव से पूर्णिमा व्रत को करती थी। किन्तु छोटी पुत्री श्रद्धा-भाव से पूर्णिमा व्रत को नहीं कर पाती थी। फलस्वरूप छोटी पुत्री की संतान पैदा होते ही मर जाती थी। devotional sharad purnima history

साहूकार की पुत्री ने पंडितों से इसका कारण पूछा तो पंडित ने बताया की तुम पूर्णिमा व्रत को श्रद्धा-पूर्वक नहीं करती हो। जिस कारण तुम्हारी संतान पैदा होते ही मर जाती है। पूर्णिमा व्रत को श्रद्धा व् विधि पूर्वक करने से तुम्हारी संतान जीवित रह सकती है। devotional sharad purnima history

साहूकार की पुत्री ने पंडितों की वचनों का पालन करते हुए विधि पूर्वक पूर्णिमा व्रत को करती है। व्रत प्रभाव से साहूकार की पुत्री को शीघ्र ही पुत्र की प्राप्ति होती है। उसके बाद नगर में पूर्णिमा व्रत की महिमा समस्त नगर में फ़ैल जाता है।




विधान

इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठें, दैनिक कार्य से निवृत होकर सर्वप्रथम सूर्यदेव को अर्घ्य दें। तत्पश्चात कलश स्थापित करें। इस कलश के ऊपर माँ लक्ष्मी की प्रतिमूर्ति को स्थापित करें। मूर्ति स्थापित करने के पश्चात माँ लक्ष्मी की पूजा विधि-पूर्वक करें।

प्रदोष व्रत की कथा एवम इतिहास

संध्याकाल में चंद्रोदय होने पर संध्या आरती घी के दीप जलाकर करें। दीप प्रज्वलित करने के पश्चात भोजन में खीर बनाएं। खीर बनने के बाद एक पात्र में खीर डालकर उसे चन्द्रमा की चांदनी में रखें। जब एक प्रहर बीत जाएँ, तब खीर को लक्ष्मी जी को अर्पित करें। devotional sharad purnima history

तत्पश्चात भक्तिपूर्वक इस खीर को प्रसाद स्वरूप परिवार में बाँटें। शरद पूर्णिमा की रात्रि में जागरण करें। प्रातःकाल स्नान करके पूजा-अर्चना पश्चात लक्ष्मी जी की प्रतिमा को आचार्य को सौप दें। शरद पूर्णिमा की रात्रि में माँ लक्ष्मी जी भूतल पर विचरण करती है। जो मनुष्य इस दिन रात्रि जागरण करता है। माँ लक्ष्मी जी उसे धन प्रदान करती है। इस प्रकार शरद पूर्णिमा की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ लक्ष्मी जी की जय। devotional sharad purnima history
( प्रवीण कुमार )

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