जानिए तीर्थ नगरी चित्रकूट की पौराणिक एवं धार्मिक गाथा

भारत तीर्थों का स्थल है। जहाँ भिन्न भिन्न जगहों पर भिन्न भिन्न तीर्थ स्थल है। जहाँ उत्तर में हिमालय, कैलाश पर्वत, अमरनाथ शिवलिंग, माँ वैष्णों देवी, स्वर्ण मंदिर, केदार नाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, हरिद्वार, मथुरा, अयोध्या, वृन्दावन है तो दक्षिण में कन्याकुमारी, रामेश्वरम, तिरुपति बालाजी है। वही पश्चिम में श्रीडीह साई मंदिर, शनि सिग्नापुर है तो पूर्व में माँ कामाख्या मंदिर, मानसरोवर आदि है। इसके अतिरक्त विभिन्न धर्मों के सैकड़ों तीर्थस्थल है। इसमें से एक तीर्थ स्थल चित्रकूट है। जो अपनी पवित्रता के लिए अति प्रसिद्ध है। इस तीर्थ स्थल का नामकरण हिंदी के दो शब्द चित्र और कूट से हुआ है। चित्र यानि की विभिन्न रंगों वाले दृश्य अथवा छवि कूट यानि की पर्वत है। चित्रकूट उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश में स्थित है। know epic chitrakoot history

चित्रकूट की प्राचीन और पौराणिक सीमा मन्दाकिनी पयस्वनी नदी द्वारा निर्धारित है। चित्रकूट धाम दो प्रदेश मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है। यह चित्रकूट जिले के कर्वी एवं सीतापुर और मध्य प्रदेश के सतना जिले के कोहली, कामता व नयागांव का समूह है। महान कवि कालिदास ने ‘मेघदूत’ की रचना इसी स्थान पर कर इस स्थान को धन्य किया है। know epic chitrakoot history

चित्रकूट का माहात्म्य अति प्राचीन और पौराणिक है know epic chitrakoot history

धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्री राम ने प्रवास काल अर्थात वनवास के दिनों में यहाँ निवास किया था। इसके अतिरिक्त महान महर्षि अत्रि का आश्रम भी यहीं पर था। चित्रकुल सतयुग काल से तपोभूमि रही है। अनेकानेक ऋषि मुनियों ने इस पावन धरती पर वास किया है। know epic chitrakoot history

सीतापुर

पयस्विनी नदी के किनारे चित्रकूट धाम की प्रमुख बस्ती सीतापुर बसी है। सीतापुर आदिकाल में जयसिंहपुर के नाम से जाना जाता था। इस नगर में उत्तर प्रदेश पर्यटन कार्यालय एवं पर्यटक आवास गृह अवस्थित है। know epic chitrakoot history

पयस्विनी नदी ( मंदाकिनी )

मध्य प्रदेश के सतना जिले की सीमा पर अनसुइया आश्रम के जंगलों से प्रवाहित पतली जलधारा मिलती है। इसी जलधारा को मन्दाकिनी कहते है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी पवित्र स्थान पर मर्यादा भगवान् पुरषोत्तम राम ने अपने पिता स्वर्गीय महाराजा दशरथ की तिलांजलि दी थी। इस नदी के तट पर 24 पक्के घाट है, जिनमें कैलाश घाट, राघव घाट, धृतकुल्या घाट व राघव घाट प्रमुख है। know epic chitrakoot history

पयस्विनी नदी ( मंदाकिनी )

मध्य प्रदेश के सतना जिले की सीमा पर अनसुइया आश्रम के जंगलों से प्रवाहित पतली जलधारा मिलती है। इसी जलधारा को मन्दाकिनी कहते है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी पवित्र स्थान पर मर्यादा भगवान् पुरषोत्तम राम ने अपने पिता स्वर्गीय महाराजा दशरथ की तिलांजलि दी थी। इस नदी के तट पर 24 पक्के घाट है, जिनमें कैलाश घाट, राघव घाट, धृतकुल्या घाट व राघव घाट प्रमुख है। know epic chitrakoot history

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