पौष अमावस्या की कथा एवं इतिहास

Paush Amavasya vrat atha

हिंदी पंचांग के अनुसार इस वर्ष का पौष अमावस्या सोमवार 18 दिसंबर  2017 को है। हिन्दू धर्म में अमावस्या तथा पूर्णिमा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस दिन स्नान, दान तथा अन्य धार्मिक कार्य किये जाते है।मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन अन्य अमावस्या की तरह पूर्वजो के पूजन का विधान है। Paush Amavasya vrat atha 

धार्मिक धारणाये
पौष अमावस्या कई धार्मिक कार्यो के लिए प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है की पितरो को मोक्ष प्राप्ति और सद्गति के लिए अमावश्या का व्रत करना चाहिए। इस व्रत को करने से ना केवल पितरो को मोक्ष एवम शांति मिलती है बल्कि व्रतधारी को अमोघ फल की प्राप्ति होती है। Paush Amavasya vrat atha 

पौष अमावस्या महत्व Paush Amavasya vrat atha 

पौष अमावस्या के दिन पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना आदि नदियों में स्नान करके तिल को नदी में प्रवाहित करे। तत्पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य दे एवम पितरो का तर्पण करे । इस दिन ब्राह्मणो एवम गरीब को यथा शक्ति दान दे। Paush Amavasya vrat atha 

मासिक शिवरात्रि की कथा एवं इतिहास

पौष अमावस्या व्रतधारी के लिए लाभकारी होता है। जो व्रती अमावश्या व्रत को विधि-विधान एवं शुद्ध मन से व्रत करता है उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इस तरह पौष अमावस्या व्रत की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान शिव जी की जय। Paush Amavasya vrat atha 
( प्रवीण कुमार )

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